फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली में किडनी रैकेट का खुलासा, डोनर का मेकओवर कर करते थे सौदा

Mon, 29 May 2017 09:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
पुलिस की गिरफ्त में किडनी रैकेट के सदस्य। - फोटो : ANI
विज्ञापन
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली में एक और किडनी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक आरोपी संगम विहार स्थित बत्रा अस्पताल का कर्मचारी है। ये रैकेट सौदा करने के लिए डोनर का बाकायदा मेकओवर भी करते थे। यही नहीं, उसकी फर्जी डीएनए रिपोर्ट भी बनाई जाती थी।
विज्ञापन


किडनी रैकेट मामले में नाम आने के बाद दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने बत्रा अस्पताल के सीनियर डॉक्टर से पूछताछ की है। पुलिस सूत्रों की मानें तो डॉक्टर ने किडनी रैकेट से जुड़े होने की बात से इंकार किया है। उन्होंने पुलिस को बताया है कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता जयदीप शर्मा को हैदराबाद के दंपति का बेटा बताकर अस्पताल प्रशासन से मिलवाया था।

इस संबंध में आरोपियों ने सभी कागजात भी उन्हें दिए थे। सूत्रों के मुताबिक बत्रा अस्पताल के सीनियर डॉक्टर को रविवार को दुबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इधर पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि तीन-चार और बड़े अस्पतालों में किडनी रैकेट चलाने वाले गैंग के तार जुड़े हुए है। पुलिस उसके आधार पर मामले की छानबीन कर रही है।    
विज्ञापन


आरोपियों ने हैदराबाद के एक शख्स को किडनी दिलाने के लिए उसके परिजनों से 40 लाख रुपये लिए और जयपुर के एक एमबीए छात्र को किडनी डोनेट करने के लिए उससे चार लाख रुपये में सौदा तय कर लिया। 

सौदा तय होने के बाद बृहस्पतिवार को बत्रा अस्पताल ने डोनर को अस्पताल बुलाया। जहां डॉक्टरों की कमेटी ने उसे किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए हरी झंडी दे दी। पूरे मामले पर नजर रख रही क्राइम ब्रांच ने अलग- अलग जगहों से चार आरोपियों को दबोच लिया। गिरोह ने अब तक 20 किडनी ट्रांसप्लांट करवाने की बात स्वीकार की है।    
         
क्राइम ब्रांच के संयुक्त आयुक्त प्रवीर रंजन ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कटक उड़ीसा निवासी जयंत साहू उर्फ राहुल, जजपुर उड़ीसा निवासी सुलेखा पांडा, खुरदा उड़ीसा निवासी अनोज पात्रा व किशनगढ़ बसंतकुंज निवासी बिरजू पासवान के रूप में हुई है। बिरजू पासवान बत्रा अस्पताल का कर्मचारी है। इससे पूर्व वह दिल्ली के अन्य बड़े अस्पताल में काम कर चुका है।             

पुलिस के अनुसार जयदीप शर्मा जयपुर में एमबीए की पढ़ाई कर रहा है। जयदीप के मुताबिक उसका दोस्त राजेश पिछले साल सितंबर माह में इंटरनेट पर सर्च कर रहा था। इस दौरान उसने एक साइट पर देखा कि किडनी डोनेट करने पर मोटी रकम मिलेगी। पैसे की जरूरत की वजह से राजेश गिरोह के संपर्क में आकर दिल्ली आ गया। लेकिन उसके बाद से राजेश का कोई अता-पता नहीं है। जयदीप अपने दोस्त को तलाशने के लिए दिल्ली आया और गिरोह से संपर्क किया। उसके बाद जयदीप एक न्यूज चैनल से संपर्क कर उन्हें सारी जानकारी दी। 
विज्ञापन

ऐसे हुआ रैकेट का खुलासा

डेमो पिक
न्यूज चैनल ने क्राइम ब्रांच की मदद ली। 20 सदस्यीय क्राइम ब्रांच की टीम के साथ न्यूज चैनल की टीम बतौर डोनर बने जयदीप के साथ 40 दिनों तक रैकेट से जुड़े लोगों का स्टिंग किया। पुलिस की टीम ने पूरी प्रक्रिया के दौरान चैनल के टीम के साथ रही और करीब दो सौ घंटे की वीडियो रिकार्डिंग की। उसके बाद पुलिस ने चार आरोपियों को दबोच लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को छह दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। शुक्रवार को पुलिस ने बत्रा अस्पताल के कुछ डॉक्टरों को नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाकर उनसे पूछताछ की है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में कई और गिरफ्तारी संभव है।             

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जयदीप की दिल्ली में सबसे पहले इम्तियाज नाम के शख्स से मुलाकात हुई। उसके बाद उसकी मुलाकात अरुण दास नाम के व्यक्ति से हुई। दोनों ने उसे किडनी डोनेट करने के बारे में बताया। उसके बाद उसकी मुलाकात जयदीप साहू से हुई। जिसने पीड़ित से रुपये के बारे में बातचीत की। उसने डोनर को किडनी डोनेट करने के एवज में चार लाख रुपये देने की बात कही। रुपये की बात तय होने के बाद जयदीप को हौजरानी इलाके में रखा गया। वहां मौजूद सुलेखा ने डोनर को किडनी डोनेट के बारे में सारी बारीकियों से अवगत कराया और उसे किडनी डोनेट करने के लिए तैयार किया। मनोज पात्रा हौजरानी में डोनर की देख रेख करता था। हौजरानी में पुलिस को दो लोग मिले हैं जिसमें से एक का किडनी डोनेट हो चुका है जबकि दूसरे का होना था।              

गिरोह के सदस्यों ने हैदराबाद के एक परिवार से 40 लाख रुपये में सौदा तय किया। पीड़ित का बेटे मधुमेह बीमारी होने की वजह से किडनी डोनेट नहीं कर पा रहा था। इसलिए गिरोह के सदस्यों ने जयदीप को पीड़ित के बेटे के तौर पर उसका मेकओवर किया। आरोपियों ने जयदीप के आधार कार्ड, पहचान पत्र व मैट्रिक का फर्जी सर्टिफिकेट तैयार किए। जयदीप को पीड़ित के परिवार के बारे में सारी जानकारी दी गई, ताकि वह डॉक्टरों की कमेटी के सामने सही जवाब दे सके। बत्रा अस्पताल में जयदीप का इंटरव्यू लिया गया। जिसमें उसने तीन सवालों का गलत जवाब दिया, इसके बावजूद उसे कमेटी ने पास कर दिया।             

जांच में पता चला है कि किडनी रैकेट से जुड़े लोग सोशल नेटवर्किंग साइट्स की मदद से गोरखधंधे को अंजाम दे रहे हैं। गिरोह के तार दिल्ली, यूपी, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू, उड़ीसा, राजस्थान सहित अन्य राज्यों में फैला हुआ है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार रैकेट से जुड़े लोग अलग-अलग नाम से गूगल पर पांच साइट्स बना रखा है। जिसकी मदद से वह किडनी की खरीद फरोख्त करते हैं। आरोपियों ने फेसबुक पर भी एक पेज बना रखा है। फेसबुक के जरिये आरोपी लोगों को मैसेज भेजते हैं। जो लोग किडनी खरीदने व बेचना चाहते हैं उनके लिए फोन नंबर व ईमेल आईडी भी मुहैया करते हैं। जिससे उनसे संपर्क किया जा सके।    
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें