बीपीओ कर्मी जिगिषा घोष की हत्या पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के मुताबिक गला दबाकर की गई थी लेकिन पुलिस ने उसके गले से चांस फिंगर प्रिंट (मौके से लिए जाने वाले) नहीं लिए थे।
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इसी कारण आरोपियों के फिंगर प्रिंट का मिलान भी नहीं हो सका। यह खुलासा मामले में बचाव व अभियोजन पक्ष की जिरह में हुआ। साकेत जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने जिगिषा घोष हत्याकांड मामले में अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद चार जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सात साल से ज्यादा पुराने इस मामले में बृहस्पतिवार को फैसला आने वाला है। बता दें कि यह केस शुरुआत से ही मीडिया की सुर्खियों में बना रहा है, कभी मामले की सुनवाई में देरी तो कभी पुलिस की जांच में खामी के कारण।
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पुलिस ने केस के कई अहम गवाहों से पूछताछ नहीं की और न उनका बयान ही दर्ज किया। पुलिसिया जांच में कई खामियां रहीं जिनका फायदा आरोपियों को मिल सकता है।
अदालत में दोनों पक्षों की जिरह में हुआ अहम खुलासा
कोर्ट, अदालत
- फोटो : file photo
पुलिस ने नहीं लिए फिंगर प्रिंट
अदालत में दोनों पक्षों के बीच हुई जिरह में कई बिंदु सामने आए हैं। जिनमें दिल्ली पुलिस की जांच की सबसे बड़ी खामी यह रही कि मृतका के गले से पुलिस ने चांस फिंगर प्रिंट नहीं लिए जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक हत्या गला दबाकर की गई थी।
मामले में तथाकथित हत्यारों के फिंगर प्रिंट पुलिस ने नहीं लिए। अभियोजन पक्ष इस बात कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया कि फिंगर प्रिंट क्यों नहीं लिए गए। इन खामियों का फायदा आरोपियों को मिल सकता है। अगर यह किया गया होता तो अभियोजन को फॉरेंसिक साक्ष्य मिल सकते थे। अभियोजन पक्ष के मुताबिक तीन आरोपियों ने 18 मार्च 2009 की आधी रात के बाद जिगिषा को अगवा कर लिया था।
इसके बाद उसे लेकर महिपालपुर स्थित एटीएम से कैश निकाला, बाद में उसकी हत्या कर शव को फरीदाबाद में सूरजकुंड के जंगलों में फेंक दिया। आरोपियों ने बाद में क्रेडिट कार्ड से सरोजनी नगर मार्केट से खरीदारी भी की।
पुलिस ने इन दुकानों की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर रवि कपूर व अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अभियोजन पक्ष ने सरोजनी नगर मार्केट स्थित प्रेम वॉच कंपनी नामक दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे की हार्ड डिस्क पेश की।
बचान पक्ष ने पुलिसिया जांच की कई बड़ी खामियों को किय उजागर
पुलिस
- फोटो : file photo
बचाव पक्ष के मुताबिक इस हार्ड डिस्क की फुटेज में आरोपी दुकान में आते जाते व खरीदारी करते नजर आ रहे हैं लेकिन वह जिगिषा के क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि पुलिस ने लेन देने की स्लिप कोर्ट में पेश की थी।
पुलिस की जांच में कई छेद
दूसरी ओर बचाव पक्ष ने अभियोजन की दलीलों को खारिज करते हुए पुलिसिया जांच की कई बड़ी खामियों को उजागर कर दिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता दीपक शर्मा ने कहा कि पुलिस के मुताबिक जिगिषा की हत्या गला घोंट कर की गई थी लेकिन उसके गले से कोई चांस फिंगर प्रिंट पुलिस ने नहीं लिए।
पुलिस ने आरोपियों के फिंगर प्रिंट भी नहीं लिए, इसलिये उनके मिलान करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। वहीं, पुलिस के मुताबिक जिगिषा का मोबाइल मामले में आरोपी रवि कपूर ने फेंक दिया था।
इस मोबाइल को कपिल नामक युवक ने उठाया था लेकिन पुलिस ने इससे न पूछताछ की और न इसे गवाह बनाया। पुलिस ने हत्या के सात साल बाद कपिल शर्मा व पांच लोगों को गवाह बनाने की अर्जी इस वर्ष दो जनवरी को दायर की थी जिसे कोर्ट ने मार्च में खारिज कर दिया था।
क्या था पूरा मामला
पीड़िता जिगिसा 18 मार्च 2009 को गायब हुई थी और दो दिन बाद उसकी लाश सूरजकुंड के जंगलों में मिली थी। पुलिस ने इस मामले में रवि कपूर व अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उस समय रवि कपूर की गाड़ी से बीकन, पुलिस की वर्दी, संयुक्त पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी के कार की थ्री स्टार नंबर प्लेट, पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट का स्टीकर मिला था। पुलिस की चार्जशीट इन सब बातों पर पूरी तरह खामोश थी।