आयकर विभाग जल्द ही कुछ बड़ी कार्रवाई करने जा रहा है। इसमें कई विभागों के अफसर, इंजीनियर और ठेकेदारों पर शिकंजा कसा जा सकता है। विभाग की इंटेलिजेंस विंग की रिपोर्ट के आधार पर कुछ लोगों को चिन्हित किया गया है।
बताया जा रहा है कि इस बार एनसीआर में नोएडा, गाजियाबाद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आधा दर्जन शहरों में कार्रवाई होगी। सिंचाई, पीडब्ल्यूडी के साथ अन्य विभागों से जुड़े अफसर व ठेकेदार निशाने पर हैं।
16 जून को मेरठ में सिंचाई विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर सुधीर शर्मा, ठेकेदार राजवीर सिंह और उसके बेटों के प्रतिष्ठानों पर छापा मारा गया था। इस कार्रवाई से जब्त रिकार्डों से कुछ अहम जानकारी हाथ लगी है, जिससे पता चलता है कि ठेकेदार राजवीर सिंह की फर्मों में सिंचाई, पीडब्ल्यूडी व अन्य विभागों से सेवानिवृत्त इंजीनियर बतौर कर्मचारी के रूप में कार्यरत रहे।
इन्हीं की मदद से सेटिंग कर टेंडर हासिल किए जाते थे। सूत्र बताते हैं कि जब्त कागजात में 15 से अधिक बैंक खातों की जानकारी मिली जो सेवानिवृत्त इंजीनियरों व रिश्तेदारों के निकले। बीते एक साल के दौरान खातों में फर्म के एकाउंट से मोटा लेनदेन हुआ। ऐसे में मामला संदिग्ध मानते हुए आयकर विभाग ने राजवीर सिंह व उसके बेटों की सभी फर्मों के बैंक खातों का आडिट करने का फैसला लिया।
बीते छह साल के आडिट में काफी चौंकाने वाली जानकारी हाथ लग रही है, जिससे पता चला कि सरकारी विभागों के अधिकारियों व इंजीनियरों को मोटी रकम खिलाई गई। उसके बाद शेष कमाई को ठिकाने लगाने के लिए रिश्तेदारों तक की मदद ली गई।
यहीं कारण रहा कि मेरठ व मुजफ्फरनगर निवासी राजवीर के रिश्तेदार चंद वर्षों में करोड़ों के मालिक बन गए। एक सेवानिवृत्त इंजीनियर व रिश्तेदार की कमाई 2015 से 2017 के बीच कई सौ गुना बढ़ी, जिन पर अब आयकर का शिकंजा नोटिस जारी कर शिकंजा कस रहा है।
उधर, कार्रवाई के रिजल्ट को देख आयकर विभाग सिंचाई व अन्य विभागों के कुछ दूसरे धनकुबेरों पर कार्रवाई की तैयारी में है। विभाग का मानना है कि 10-15 वर्षों में यूपी के कुछ सरकारी विभाग अधिकारियों, इंजीनियरों व ठेकेदारों के लिए बड़ी कमाई का जरिया बने हैं जिन पर कार्रवाई से बड़ी टैक्स चोरी पकड़ी जा सकती है।