पुलिस लाइन के टॉवर-डी में रह रहे हेड कांस्टेबल मलिक राम ने बृहस्पतिवार दोपहर फांसी लगाकर जान दे दी। वह शहर थाने में तैनात थे। पेट में दर्द होने की बात कह कर उन्होंने थाने से छुट्टी ली थी। मौके पर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
आत्महत्या के पीछे बीमारी होना बताया जा रहा है। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने हेड कांस्टेबल का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया।पुलिस के मुताबिक, मलिकराम ने सुबह 10 बजे अपने सहकर्मियों को थाने में फोन कर बताया था कि उसके उसके पेट में दर्द है। इसलिए वह आज आराम करेगा।
हालांकि उसने पेटदर्द होने की जानकारी अपनी पत्नी को भी नहीं दी थी। फांसी लगाने से पहले उन्होंने पत्नी एवं दोनों बच्चों को शहर में ही रह रहे अपने ससुर के घर भेज दिया था। दोपहर के समय उसकी पत्नी ने अपने मायके से मलिकराम के पास फोन किया, लेकिन जब फोन नहीं उठा तो उसने अपने पिता को पुलिस लाइन भेजा।
दुपट्टे के सहारे पंखे से झूल रहा था मलिक राम का शव
सुसाइड
- फोटो : अमर उजाला
जब मलिक राम के ससुर पुलिस लाइन स्थित टॉवर-डी में उसके फ्लैट नंबर-703 पर पहुंचे तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। उन्होंने कई बार इसके बाद पड़ोसियों की मदद से दरवाजे को तोड़ा गया।
अंदर मलिक राम का शव दुपट्टे के सहारे पंखे से झूल रहा था। तुरंत मामले की जानकारी अपनी बेटी एवं पुलिस को दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में ले लिया।
पुलिस के अनुसार, मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। अभी पूरी तरह से यह साफ नहीं हो पाया कि उन्होंने फांसी किन कारणों से लगाई। प्रथम दृष्टया बीमारी को इसका कारण माना जा रहा है। पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक घटना के कारणों की पड़ताल की जा रही है। मृतक पुलिसकर्मी मूल रूप से झज्जर जिले के गांव सूरजगढ़ का रहने वाला था।
पहले भी पुलिस कर्मी कर चुके हैं आत्महत्या
साइबर सिटी के पुलिस कर्मी पहले भी कई बार आत्महत्या कर चुके हैं। मई 2013 में निरीक्षक इंद्रदत्त ने अपने लिव इन पार्टनर की हत्या करने के बाद सुशांत लोक के आरडी सिटी में मौत को गले लगा लिया था। वहीं, इसी साल मई माह में शहर थाने के एएसआई महाबीर ने बल्लभगढ़ स्थित अपने पैतृक आवास पर आत्महत्या कर ली थी।