बॉलीवुड की फिल्म बंटी और बबली में जहां दो फिल्मी कलाकारों ने आगरा के ताजमहल को बेच दिया था, वहीं जीडीए के दो बाबू और तीन सुपरवाइजरों ने उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत (तत्कालीन केंद्रीय मंत्री) के नाम आवंटित प्लाट का ही सौदा सपा के एक नामित सभासद गुलाब सिंह से कर डाला।
जालसाज कर्मचारियों ने बतौर बयाना 25 लाख रुपये भी हड़प लिए। ठगी की भनक लगने पर गुलाब सिंह ने जीडीए अधिकारियों से भी शिकायत की। दो साल से अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद अब उसने सिहानी गेट थाने में आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
अकबरपुर बहरामपुर निवासी गुलाब सिंह यादव मोदीनगर पालिका में नामित सभासद हैं। गुलाब सिंह ने बताया कि फरवरी 2010 में जीडीए के बाबू मेवा लाल, प्रशांत कुमार, राजेंद्र और सुपरवाइजर वीरपाल राघव और चंद्रपाल ने इंदिरापुरम के ज्ञानखंड स्थित आई/165 प्लाॅट और गोविंदपुर स्थित एचआईजी फ्लैट-जी-591 को उसे खरीदवाने का भरोसा दिलाया।
आरोपियों का कहना था कि प्लाॅट और फ्लैट के प्रथम आवंटी उनके भरोसे के हैं। दोनों का सौदा 1.02 करोड़ में तय हुआ। बयाने के तौर पर उससे 25 लाख रुपये भी ले लिए। चार माह बाद रजिस्ट्री का वादा किया, मगर रजिस्ट्री नहीं कराई।
2 साल पहले की थी शिकायत
गुलाब सिंह ने बताया कि उसे आरोपियों पर शक हुआ और खुद ही उक्त प्रापर्टी के मालिक की जीडीएम में जानकारी की तो वह दंग रह गया। ज्ञानखंद स्थित प्लाॅट उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत के नाम पर आवंटित था।
उन्होंने मामले की शिकायत अक्तूबर 2012 में जीडीए उपाध्यक्ष से भी शिकायत की। आरोपियों की जांच शुरू हुई तो उन्होंने धीरे-धीरे पैसा वापस करने की बात कही।
किश्तों में उसे कुछ रुपया दिया भी, मगर अब पैसा देने से साफ इंकार कर रहे थे। पीड़ित ने बताया कि करीब 20 दिन पूर्व वह एक बार फिर जीडीए वीसी से मिले थे। उन्होंने ओएसडी को जांच के आदेश दिए।
उत्तराखंड के सीएम के नाम दर्ज है प्लॉट
जीडीए ओएसडी आरपी पाण्डेय ने बताया कि ज्ञानखंड के जिस प्लॉट के फर्जी दस्तावेज बनाकर ठगी की बात सामने आ रही है, वह उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत को वर्ष 1995-96 में आवंटित किया गया था।
जीडीए के रिकार्ड में आज भी वह प्लॉट उत्तराखंड के वर्तमान सीएम हरीश रावत के नाम ही दर्ज है। जीडीए साल 2005 में ही प्लॉट की रजिस्ट्री सीएम हरीश रावत के पक्ष में कर चुका है।
प्लॉट पर मकान बनाया जा चुका है, जिस पर सीएम हरीश रावत का ही कब्जा है। जीडीए में सभी रिकॉर्ड चेक करा लिए हैं। प्लॉट से संबंधित सारे रिकार्ड और दस्तावेज ठीक मिले हैं। प्रारंभिक जांच में ठगी मामले में जीडीए कर्मचारियों की संलिप्तता की पुष्टि नहीं हो रही है।