दिल्ली में गैंगवार के खतरनाक खूनी खेल के पीछे है ये असल वजह
Tue, 24 Oct 2017 09:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
सार
आरिफ-वाजिद हत्याकांड के पीछे एक ही गैंग
भजनपुरा और ब्रह्मपुरी में हत्याओं का मामला : दोनों युवक नासिर गैंग के करीबी बताए जा रहे
छेनू गैंग पर हत्याएं करवाने का शक, सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
ब्रह्मपुरी में वाजिद और भजनपुरा में आरिफ की हत्या को उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस गैंगवार से जोड़कर देख रही है। पुलिस सूत्रों की मानें तो सीसीटीवी फुटेज से यह लगभग साफ है कि जिन बाइक सवार चार बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया, वह एक ही गैंग के हैं।
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सूत्रों का कहना है कि दोनों युवकों की मौत काफी समय से इरफान उर्फ छेनू और नासिर उर्फ खैबर हैयात के बीच चल रही गैंगवार का नतीजा है। मरने वाले दोनों युवक नासिर गैंग के करीबी बताए जा रहे हैं। ऐसे में छेनू गैंग पर दोनों हत्याएं करवाने का शक है। पुलिस को भजनपुरा से सात जगह और ब्रह्मपुरी से एक जगह की सीसीटीवी फुटेज मिली है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों गैंग के बीच लंबे समय से विवादित प्रॉपर्टी, सट्टे और वर्चस्व की लड़ाई को लेकर गैंगवार चल रही है। फिलहाल दोनों जेल में बंद हैं, लेकिन इनके गुर्गे एक-दूसरे पर जानलेवा हमला करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
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2011 से चल रही दोनों पक्षों में गैंगवार
- फोटो : अमर उजाला
यही वजह है पिछले कुछ साल में दोनों ओर से डेढ़ दर्जन से अधिक हत्याएं हो चुकी हैं। दोनों गैंग के बीच चल रही गैंगवार की जड़े काफी पुरानी हैं। वर्ष 2004 में नासिर बिजनौर के रहने वाले आरिफ के साथ मिलकर अवैध हथियारों का काम करता था।
बाद में वह दिल्ली के बदमाशों को हथियार सप्लाई करने लगा। 2010 में नासिर को स्पेशल सेल ने 55 लाख की डकैती में गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद नासिर ने बदमाश हाशिम बाबा से हाथ मिला लिया। इधर, नासिर-हाशिम गैंग की आकिल मामा व छेनू के गैंग से ठन गई। छेनू उत्तर-पूर्वी जिले के बदमाश हाजी अफजाल और कमल का चचेरा भाई था।
आकिल मामा व अफजाल एक ही गैंग में थे। 2011 से दोनों के बीच गैंगवार शुरू हो गई। आकिल मामा ने नासिर के करीबी आतिफ की गोली मारकर हत्या कर दी। इधर, नासिर ने आकिल की हत्या की साजिश रची, लेकिन उसे पुलिस ने पकड़ लिया।
बदला लेने के लिए नासिर ने की थी हत्या
- फोटो : अमर उजाला
बदला लेने के लिए नासिर ने आकिल मामा के करीबी जाफराबाद निवासी मोहम्मद मतीन की हत्या कर दी। इसके बाद दोनों ओर से हत्याएं जारी रहीं। नासिर के ऊपर एक लाख का इनाम घोषित कर दिया गया।
दो नवंबर, 2013 को स्पेशल सेल ने जाफराबाद से नासिर को गिरफ्तार कर लिया। इधर, 13 नवंबर 2013 को नासिर के गुर्गों ने छेनू के करीबी आकिल मामा की गोली मारकर हत्या कर दी। दोनों ओर से गैंगवार जारी रही।
पुलिस ने हाशिम बाबा को भी दबोच लिया। 2014 में छेनू के गुर्गों ने मुस्तफाबाद में नासिर के करीबी आरिफ की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद छेनू ने 16 फरवरी, 2014 में अमरोहा के हसनपुर कोतवाली क्षेत्र में अपने गुर्गों से शाहनवाज, उसके साथी अरशद व माजिद उर्फ भूरा की गोली मारकर हत्या करवा दी थी।
जनवरी 2015 में पुलिस ने छेनू को दिल्ली की अमर कॉलोनी से गिरफ्तार कर लिया। जेल में पहुंचने के बाद भी छेनू और नासिर के बीच ब्लेडबाजी हुई। इसके बाद दोनों को रोहिणी की हाई रिस्क जेल में अलग-अलग रखा गया।
23 दिसंबर, 2015 को नासिर ने नाबालिग लड़कों से कड़कड़डूमा कोर्ट में जज के सामने छेनू पर हमला करवा दिया। हमले में दिल्ली पुलिस के एक सिपाही की मौत हो गई, जबकि छेनू पांच गोली लगकर बुरी तरह जख्मी हो गया।
इसके बाद भी दोनों गैंग में गैंगवार जारी है। माना जा रहा है कि अब वाजिद व आरिफ की हत्या छेनू पहलवान के इशारे पर हुई है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।