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दिल्ली में फर्जी एजुकेशन बोर्ड का भंडाफोड़, गुजरात तक फैला है जाल 

Sat, 09 Dec 2017 09:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला
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शाहदरा जिला पुलिस ने फर्जी एजुकेशन बोर्ड का पर्दाफाश कर बोर्ड चेयरमैन समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। बोर्ड देश के कई राज्यों में स्कूलों को फर्जी मान्यता प्रमाण पत्र, डिग्रियां और मार्कशीट देकर बड़ा फर्जीवाड़ा करता था।
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बोर्ड की मान्यता प्रमाण पत्र के सहारे यूपी, बिहार, झारखंड, पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात में बाकायदा स्कूल चल रहे हैं। जांच में ये बात सामने आई है कि ये बड़ी संख्या में फर्जी मार्कशीट व डिग्रियां बांटी जा चुकी हैं।

आरोपी करीब 20 हजार छात्रों के साथ ठगी कर चुके है। इनकेकब्जे से 20 से ज्यादा बोर्ड व यूनिवर्सिटी की करीब 17 हजार खाली व तैयार फर्जी मार्केशीट, रबड स्टाप आदि कागजात बरामद किए गए हैं।
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ईस्टर्न रेंज केसंयुक्त पुलिस आयुक्त रविन्द्र यादव के अनुसार बोर्ड ऑफ हायर सेकंडरी एजुकेशन, दिल्ली द्वारा फर्जी मार्केशीट जारी करने की महिला शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत 11 सितंबर को मिली थी।

एएसआई नरेश ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय व दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग से बोर्ड के बारे में पता किया तो पता लगा कि बोर्ड पूरी तरह फर्जी है। बोर्ड द्वारा जारी की गईं सभी मार्केशीट फर्जी हैं। मामला दर्जकर शाहदरा जिला डीसीपी नुपूर प्रसाद की देखरेख में गीता कॉलोनी थानाध्यक्ष पवन कुमार की टीम ने तफ्तीश शुरू की।

पुलिस टीम को जांच में पता लगा कि शिकायतकर्ता को प्रशांत सोलंकी (22) ने फर्जी मार्केशीट दी है। पुलिस टीम ने गोकलपुरी से प्रशांत सोलंकी को गिरफ्तार कर लिया। उसने बताया कि वह फर्जी बोर्ड में कंप्यूटर ऑपरेटर है। वह सारी फर्जी मार्केशीट बलजीत सिंह(24) से लेता था।

बुराडी से बलजीत को गिरफ्तार कर लिया। वह राजस्थान की जेल में बंद मांगेराम आचार्य उर्फ मनीष प्रताप सिंह की जगह बोर्ड डायरेक्टर का पद देखता था। बलजीत ने बताया कि वह तैयार मार्केशीट विकासपुरी स्थित बोर्ड ऑफ हायर सेकंडरी एजुकेशन से लेता था। पुलिस टीम ने यहां दबिश देकर तीन आरोपी अलताफ राजा(22), रामदेव शर्मा(65) व लक्ष्य राठौर उर्फ अमित(24) को गिफ्तार कर लिया।

पूछताछ में रामदेव ने बताया कि वह बोर्ड में बतौर कर्मचारी काम करते थे। उसने बताया कि बोर्ड का चेयरमैन गांव पोस्ट कानपा, जिला प्रतापगढ यूपी निवासी शिवप्रसाद पांडेय(65) है और वह लखनऊ से बोर्ड को चला रहा है। पुलिस ने लखनऊ, यूपी में दबिश देकर शिवप्रसाद पांडेय को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी स्थानीय समाचार पत्रों में आठवीं फेल को सीधा दसवीं व बारहवीं की मार्केशीट देने का विज्ञापन देते थे। ये प्राइवेट स्कूलों को मान्यता देने का भी विज्ञापन देते थे। ये बोर्ड में स्टाफ की भर्ती का भी विज्ञापन देते थे।

बोर्ड की बेवसाइट के अनुसार उत्तर भारत के कई राज्यों के करीब 250-300 स्कूलों को बोर्ड ने मान्यता दे रखी थी। बेवसाइट का यूआरएल नंबर भी था ताकि लोगों को मान्यता असली लगे। बोर्ड के कई प्रादेशिक ऑफिस रिमोट एरिया से चलते थे। ये स्कूलों को मान्यता देने के लिए 10 से 15 हजार रुपये लेते थे।
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कुछ ही घंटों में बोर्ड की मार्केशीट तैयार हो जाती थी- 

- फोटो : अमर उजाला
शाहदरा जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार बोर्ड चेयरमैन पिछले पांच वर्षों से लखनऊ से फर्जी बोर्ड का गोरखधंधा चला रहा था। ये बोर्ड का उत्तर भारत केअलावा बिहार व उत्तरप्रदेश का काम देखता था। बोर्ड डिमांड होने पर कुछ ही घंटों में किसी भी बोर्ड की मार्केशीट तैयार कर देता था। ये समाचार पत्रों में बोर्ड की मान्यता देने के लिए विज्ञापन देते थे।

ये पहली से पांच तक मान्यता देने के लिए दस हजार, छह से आठवीं तक मान्यता देने के लिए 21 हजार और उत्तरप्रदेश व बिहार से जुड़े स्कूलों को आठवीं से 12वीं तक मान्यता देने के लिए 51 हजार रुपये लेते थे। जबकि पंजाब, गुजरात, कर्नाटक व महाराष्ट्र के स्कूलों को मान्यता देने के लिए एक से 2.5 लाख रुपये लेते थे। 

आवेदन फार्म का 1500 रुपये लेते थे- 
चेयरमैन शिवप्रसाद पांडेय छात्रों से आवेदन फार्म का 1500 रुपये लेता था। ये छात्र को मॉडल प्रश्नपत्र व स्टडी मेटेरियल देता था। ये बोर्ड के विभिन्न राज्यों में स्थित कार्यालयों की कमाई को बैंकों में जमा कराते थे। 

फर्जी मार्केशीट के आधार पर लोग बाहर जा चुके हैं
शिवकुमार पांडेय ने बताया कि वह वर्ष 2012 से लेकर अब तक पांच हजार लोगों को फर्जी मार्केशीट दे चुका है। इस फर्जी मार्केशीट के आधार पर लखनऊ,यूपी स्थिति पासपोर्ट कार्यालय से पासपोर्ट बनाकर विदेश जा चुकेहैं और वहां नौकरी कर रहे हैं। इस मामले की जांच की जा रही है। इन मार्केशीट के आधार पर कुछ लोग यूपी पुलिस, रेलवे, पोस्ट ऑफिसर, आर्मी व पैरा-मिलिट्र्री फोर्सेज में नौकरी कर रहे हैं। 

अफसरों की हो सकती है मेहरबानी
दिल्ली पुलिस अधिकारियों ने इस बात से इंकार नहीं किया है कि इस फर्जी बोर्ड के ऊपर शिक्षा विभाग समेत अन्य सरकारी अफसरों की मेहरबानी हो सकती है। पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है। 

प्रधानमंत्री का फोटो लगाकर विश्वास दिलाते थे
शिक्षा बोर्ड का फर्जीवाड़ा उसकी वेबसाइट के जरिये चल रहा था। ये लोगों पर अपना प्रभाव जमाने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ते थे। वेबसाइट के होमपेज पर जगह-जगह प्रधानमंत्री का फोटो लगाते थे। साथ ही ये मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मान्यता होने का दावा करते थे।
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