शाहदरा जिला पुलिस ने फर्जी एजुकेशन बोर्ड का पर्दाफाश कर बोर्ड चेयरमैन समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। बोर्ड देश के कई राज्यों में स्कूलों को फर्जी मान्यता प्रमाण पत्र, डिग्रियां और मार्कशीट देकर बड़ा फर्जीवाड़ा करता था।
बोर्ड की मान्यता प्रमाण पत्र के सहारे यूपी, बिहार, झारखंड, पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात में बाकायदा स्कूल चल रहे हैं। जांच में ये बात सामने आई है कि ये बड़ी संख्या में फर्जी मार्कशीट व डिग्रियां बांटी जा चुकी हैं।
आरोपी करीब 20 हजार छात्रों के साथ ठगी कर चुके है। इनकेकब्जे से 20 से ज्यादा बोर्ड व यूनिवर्सिटी की करीब 17 हजार खाली व तैयार फर्जी मार्केशीट, रबड स्टाप आदि कागजात बरामद किए गए हैं।
ईस्टर्न रेंज केसंयुक्त पुलिस आयुक्त रविन्द्र यादव के अनुसार बोर्ड ऑफ हायर सेकंडरी एजुकेशन, दिल्ली द्वारा फर्जी मार्केशीट जारी करने की महिला शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत 11 सितंबर को मिली थी।
एएसआई नरेश ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय व दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग से बोर्ड के बारे में पता किया तो पता लगा कि बोर्ड पूरी तरह फर्जी है। बोर्ड द्वारा जारी की गईं सभी मार्केशीट फर्जी हैं। मामला दर्जकर शाहदरा जिला डीसीपी नुपूर प्रसाद की देखरेख में गीता कॉलोनी थानाध्यक्ष पवन कुमार की टीम ने तफ्तीश शुरू की।
पुलिस टीम को जांच में पता लगा कि शिकायतकर्ता को प्रशांत सोलंकी (22) ने फर्जी मार्केशीट दी है। पुलिस टीम ने गोकलपुरी से प्रशांत सोलंकी को गिरफ्तार कर लिया। उसने बताया कि वह फर्जी बोर्ड में कंप्यूटर ऑपरेटर है। वह सारी फर्जी मार्केशीट बलजीत सिंह(24) से लेता था।
बुराडी से बलजीत को गिरफ्तार कर लिया। वह राजस्थान की जेल में बंद मांगेराम आचार्य उर्फ मनीष प्रताप सिंह की जगह बोर्ड डायरेक्टर का पद देखता था। बलजीत ने बताया कि वह तैयार मार्केशीट विकासपुरी स्थित बोर्ड ऑफ हायर सेकंडरी एजुकेशन से लेता था। पुलिस टीम ने यहां दबिश देकर तीन आरोपी अलताफ राजा(22), रामदेव शर्मा(65) व लक्ष्य राठौर उर्फ अमित(24) को गिफ्तार कर लिया।
पूछताछ में रामदेव ने बताया कि वह बोर्ड में बतौर कर्मचारी काम करते थे। उसने बताया कि बोर्ड का चेयरमैन गांव पोस्ट कानपा, जिला प्रतापगढ यूपी निवासी शिवप्रसाद पांडेय(65) है और वह लखनऊ से बोर्ड को चला रहा है। पुलिस ने लखनऊ, यूपी में दबिश देकर शिवप्रसाद पांडेय को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी स्थानीय समाचार पत्रों में आठवीं फेल को सीधा दसवीं व बारहवीं की मार्केशीट देने का विज्ञापन देते थे। ये प्राइवेट स्कूलों को मान्यता देने का भी विज्ञापन देते थे। ये बोर्ड में स्टाफ की भर्ती का भी विज्ञापन देते थे।
बोर्ड की बेवसाइट के अनुसार उत्तर भारत के कई राज्यों के करीब 250-300 स्कूलों को बोर्ड ने मान्यता दे रखी थी। बेवसाइट का यूआरएल नंबर भी था ताकि लोगों को मान्यता असली लगे। बोर्ड के कई प्रादेशिक ऑफिस रिमोट एरिया से चलते थे। ये स्कूलों को मान्यता देने के लिए 10 से 15 हजार रुपये लेते थे।