मात्र पांच सौ रुपये को लेकर हुए झगड़े में महिला ने एक युवक को रेप के प्रयास के झूठे मामले में फंसा दिया।
अदालत के समक्ष सच्चाई खुली तो महिला के पति न अन्य गवाहों ने मान लिया कि युवक के खिलाफ फर्जी मामला दर्ज करवाया था, जबकि महिला के किसी अन्य से अवैध संबंध थे। अदालत ने युवक को रिहा कर दिया।
द्वारका अदालत स्थित वीरेंद्र भट्ट ने अपने फैसले में कहा कि उसी मकान में किराएदार ने बतौर गवाह पेश होकर दुष्कर्म के प्रयास की किसी भी घटना से इनकार किया है। अदालत ने कहा महिला ने आरोप लगाया कि जब वह छत पर सो रही थी तो उनके किराएदार युवक ने रेप का प्रयास किया।
अदालत ने पीड़िता व उसके पति के चचेरे भाई के बयान को नकार दिया। अदालत ने कहा घटना के समय छत पर ही सो रहे एक अन्य किराएदार के बयान को अहम माना।
अदालत ने कहा गवाह ने कहा है कि बताए गए समय वह भी छत पर सो रहा था और उसने ऐसी कोई घटना नहीं देखी। गवाह ने कहा महिला के पति के चचेरे भाई से अवैध संबंध हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार महिला ने आरोप लगाया था कि 19 अप्रैल 2013 की रात आरोपी ने छत पर सोने के दौरान उससे दुष्कर्म का प्रयास किया। उसके शोर मचाने पर वह भाग गया।