अपह्त व्यक्ति को छुड़ाने बिहार गई दक्षिण जिला पुलिस और स्पेशल सेल को उस समय मुंह की खानी पड़ी, जब अपहरणकर्ता पुलिस के सामने ही 15 लाख रुपये लेकर फरार हो गए। दिल्ली पुलिस के जवान एक-दूसरे को देखते रह गए।
आरोपियों ने पीड़ित को फ्लाइट से पटना बुलाकर उसका अपहरण कर लिया था। अपहरणकर्ताओं ने पीड़ित को छोड़ने के बदले एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। हालांकि 15 लाख रुपये लेने के बाद अपह्त व्यक्ति को छोड़ दिया।
पुलिस के अनुसार खानपुर में रहने वाला मुकेश (37) पेशे से ठेकेदार है। उसने कुछ समय पहले पटना, बिहार में काम किया था। सितंबर महीने की शुरुआत में उसके पास बिहार से फोन आया।
फोन करने वाले ने मुकेश को काम के लिए पटना बुलाया और फ्लाइट की टिकट भेज दी। मुकेश जब पटना पहुंचा, तो उसका अपहरण कर लिया गया। अपहरणकर्ता ने मुकेश के परिजनों को दिल्ली फोन कर उसे छोड़ने के बदले एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी।
चलती गाड़ी में पहली किस्त रखवाकर पीड़ित को छोड़ा
मुकेश के पिता बनवारी ने इसकी शिकायत दक्षिण जिले के नेबसराय थाने में की। नेबसराय थाना पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। स्पेशल सेल को भी जांच में लगाया गया।
दिल्ली पुलिस ने जाल बिछाया और पीड़ित परिवार को पहली किस्त के रूप में 15 लाख रुपये देने की बात कही। स्पेशल सेल व नेबसराय थाने की पुलिस ने बिहार के लखीसराय जिले में पीरी बाजार के जंगल में घेराबंदी की।
पीड़ित को यह बता दिया गया था कि वह अपहरणकर्ताओं को रुपये तब दे, जब उनका आदमी मिल जाए। दिल्ली पुलिस के जवान भी आसपास ही तैनात रहेंगे।
डीसीपी ने कहा, नहीं है जानकारी
पुलिस की इस योजना पर पानी फेरते हुए अपहरणकर्ताओं ने मुकेश के परिजनों पर दबाव डालकर चलती गाड़ी में 15 लाख रुपये डलवा लिए और फरार हो गए।
दिल्ली पुलिस देखती रह गई। हालांकि अगले दिन अपहरणकर्ताओं ने मुकेश को छोड़ दिया। पुलिस मुकेश को दिल्ली लेकर वापस आ गई, लेकिन किसी अपहरणकर्ता को पकड़ नहीं पाई।
डीसीपी ईश्वर सिंह का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। थाने से डिटेल लेकर जानकारी देंगे। हालांकि सवाल उठता है कि इतने हाईप्रोफाइल मामले के बारे में जिला डीसीपी को जानकारी न हो।