दिल्ली हाईकोर्ट ने गैंगरेप के तीन दोषियों को राहत प्रदान करने से इंकार कर दिया।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने अपील खारिज करते हुए दोषियों के इस तर्क को खारिज कर दिया कि उनको फर्जी मामले में फंसाया गया है और खुद पीड़िता ने माना है कि वे दोषी नहीं हैं।
निचली अदालत ने 31 जनवरी 2000 को विनय कुमार त्यागी, कृष्ण कुमार और राजरूप सिंह को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष कैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी। तीनों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।