सात साल पुराने जिगिसा घोष हत्या मामले में तीन आरोपियों की सजा पर आज बहस शुरू हो जाएगी। अदालत ने इस मामले में तीन आरोपियों को 14 जुलाई को हत्या, अपहरण, लूट, फर्जीवाड़ा, साक्ष्य नष्ट करने व आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में दोषी करार दिया था।
एचपी कंप्यूटर में ऑपरेशन मैनेजर जिगिसा घोष (28) की मार्च 2009 में अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी।
अदालत ने इस मामले में सजा सुनाने से पहले सरकार को एक परीवीक्षा अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था। यह अधिकारी चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट कोर्ट को देगा। सूत्रों के मुताबिक यह अधिकारी कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश कर चुका है।
परीवीक्षा अधिकारी ने कोर्ट में पेश की रिपोर्ट
जिगिसा घोष के माता-पिता
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साकेत जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने रवि कपूर, अमित शुक्ला व बलजीत मलिक को हत्या, अपहरण, हथियार के बल पर लूट, फर्जीवाड़ा, आपराधिक साजिश व साक्ष्य नष्ट करने संबंधी धाराओं में दोषी ठहराया था।
कोर्ट ने रवि कपूर को आर्म्स एक्ट के तहत भी दोषी ठहराया था। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन यह साबित करने में कामयाब रहा है कि इन आरोपियों ने ही जिगिसा घोष को 18 मार्च 2009 की सुबह चार बजे वसंत कुंज स्थित उसके घर के बाहर से अगवा किया और उसकी हत्या की।
हत्या के बाद इन आरोपियों ने जिगिसा के शव को फरीदाबाद के जंगलों में फेंक दिया। इन आरोपियों ने उसकी सोने की चेन, दो मोबाइल, डेबिट व के्रडिट कार्ड लूटे। इन दोषियों ने उसके के्रडिट कार्ड से खरीदारी की और रसीद पर भी दस्तखत किए।