सीसीटीवी फुटेज से देश की पुलिस कई बड़े-बड़े मामलों को सुलझा रही है। मगर यही फुटेज गुड़गांव पुलिस के लिए मुसीबत बनती जा रही है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जब पुलिस कोई मामला दर्ज करती है तो उसमें से अधिकतर केस सुलझने के बजाय और उलझ जाते हैं। यही बात साइबर सिटी की पुलिस को काफी परेशान कर रही है।
गुड़गांव पुलिस को वारदात के बाद जो सीसीटीवी फुटेज मिल रही है उसकी जांच के लिए पुलिस के पास कोई हाईटेक लैब नहीं है। इस कारण भी वह फुटेज को ठीक तरह से देख नहीं पाती है। इससे फुटेज में कैद बदमाशों को ढूंढ पाना पुलिस के लिए चुनौती बन जाता है। दूसरी ओर पुलिस के दबाव में कुछ लोग सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए कम गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरों को लगवाते हैं। जिससे उसमें दर्ज फुटेज की क्वालिटी काफी खराब आती है। इससे भी वारदात को सुलझाने में परेशानी होती है।
हाल ही एक मामला जिसमें सेक्टर-12 में एक कार चालक पर आरोप है कि उसने एक व्यक्ति को टक्कर मारने के बाद कार को रोकने की बजाय उस व्यक्ति को बोनट पर बैठा कर घूमता रहा। सिविल लाइन थाना पुलिस ने सीसीटीवी के आधार पर मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की। मगर अब तक पुलिस आरोपी तक नहीं पहुंच सकी है।
होली से एक दिन पहले फर्रूखनगर के एक पंप पर तेल भराने को लेकर विवाद हुआ। जिसमें मारपीट की घटना कैद हुई है। मगर फुटेज के आधार पर पुलिस अभी तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। छोटी दीवाली को गिफ्ट देने जा रहे सट्टा कारोबारी की गोली मार हत्या हो गई थी। यह घटना कैमरे में कैद हो गई थी। इसके बावजूद पुलिस अपराधी को पहचान नहीं सकी है।
बता दें कि पुलिस आयुक्त नवदीप सिंह विर्क ने सभी प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाने का आदेश दिया है। लेकिन इस आदेश का पालन करने के लिए लोग सिर्फ खानापूर्ति कर रहे है।
सीसीटीवी में कैद प्रमुख घटनाएं...
-सेक्टर पांच में पेट्रोल पंप के सामने युवक की गोली मार हत्या
-एम जी रोड पर पर गैंगस्टर पर हुआ जानलेवा हमला।
-सेक्टर 12 में कार की बोनट पर घुमाने का मामला।
-होली के एक दिन पहले फर्रूखनगर में पेट्रोल पंप पर मारपीट।
क्या है व्यवस्था...
-पुलिस दर्ज होने वाले मामले में सीसीटीवी फुटेज की तलाश करती है। जिसे साइबर सेल से कंप्यूटर पर देखने का प्रयास होता है। उस पर मिलने वाले इनपुट के आधार पर जांच की जाती है।
-अलग-अलग मामलों के सीसीटीवी फुटेज की जांच अलग-अलग पुलिस टीम करती है।
-मामला अति गंभीर होने पर फुटेज की जांच मधुबन लैब से करायी जाती है।
-कमिश्नरी में दर्ज होने वाले अपराध में 20 प्रतिशत मामलों की जांच सीसीटीवी फुटेज के इनपुट से की जाती है।
सीसीटीवी एचडी क्वालिटी की होने से तस्वीर साफ आती है। यह थोड़ा महंगा होता है, लेकिन कई मामले में यह मददगार साबित होता है। जिससे जांच में आसानी होती है और फुटेज बिल्कुल स्पष्ट होती है।-बृजेश सैनी, निदेशक ,फेट कॉम इंडिया
पुलिस के पास उपलब्ध होने वाले सीसीटीवी फुटेज की जांच सॉफ्टवेयर के माध्यम से की जाती है। जरूरत पड़ने पर बाहर से भी जांच करायी जाती है।-नवदीप सिंह विर्क, पुलिस आयुक्त गुड़गांव