मथुरा की फोरेंसिक रिपोर्ट में बीफ की पुष्टि से इकलाख के परिवार के सदस्य मुश्किल में पड़ सकते हैं। बिसाहड़ा कांड के दौरान घर पर इकलाख का बेटा दानिश, बेटी शाइस्ता, पत्नी इकरामन, मां असगरी, भाई अफजाल के बेटे जफरुद्दीन और उसकी पत्नी घर पर मौजूद थे।
ग्रामीण इन सभी के खिलाफ गोहत्या का मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में बीफ की पुष्टि हुई है। इकलाख का परिवार मांस को लेकर बात पर झूठ बोल रहा था। अब इकलाख के परिवार भी मामला दर्ज कराना चाहिए।
ग्रामीण ओमपाल के मुताबिक सत्य के साथ चलने वाले परेशान हो सकते हैं, लेकिन पराजित नहीं हो सकते हैं। गोहत्या की बात सामने आने के बाद अब इकलाख के परिजनों पर मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
वहीं ग्रामीण मूलचंद का कहना है सच और झूठ अब दुनिया के सामने आ गया है। प्रदेश सरकार को अब इन पर गोहत्या का मामला दर्ज करना चाहिए। गोहत्या करने वालों को मिली सभी सहूलियतें सरकार वापस ले लें।
आरोपी विशाल के पिता के मुताबिक संजय राणा न्यायालय के आदेश पर मथुरा की फोरेंसिक रिपोर्ट सामने आई है। मेरे परिवार के 11 लोग इस मामले में फंसाए गए हैं। परिवार के लोग निर्दोष हैं।
अब इकलाख के बेटे दानिश, बेटी शाइस्ता, पत्नी इकरामन, मां असगरी, साथ में रहने वाले भाई अफजाल के बेटे जफरुद्दीन और उसकी पत्नी पर मामला दर्ज कराया जाए। अगर सरकार इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है तो हम कोर्ट की भी शरण लेंगे। इस परिवार की करतूतों को समाज के सामने लाएंगे।
एक नाबालिग आरोपी को मिल चुकी है जमानत
बिसाहड़ा कांड के मामले में 16 आरोपी जिला कारागार में बंद हैं। एक नाबालिग को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। मामले के एक आरोपी के गांव में न होने की पुष्टि पर उसे जांच रिपोर्ट से बाहर कर दिया गया था।
मामले की सुनवाई गौतमबुद्ध नगर न्यायालय में फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही है। पुलिस के मुताबिक, 28 सितंबर 2015 को रात करीब 11:30 बजे थाना जारचा के बिसाहड़ा गांव में इकरामन का परिवार घर पर मौजूद था।
इस बीच गांव के बी 14-15 लोग हाथों में लाठी-डंडे, तमंचा, भाला लेकर उसके घर की तरफ गाली-गलौच करते हुए आए और दरवाजे को धक्का मारकर अंदर घुस गए। पति इकलाक व उसके बेटे दानिश पर जान से मारने की नियत से हमला कर दिया। इकलाख के परिवार का आरोप है कि रुपेंद्र के हाथ में लाठी थी और वह गालियां दे रहा था।
उसके साथ विवेक, सचिन, हरिओम, श्रीओम, विशाल, विशम, संदीप, सौरभ व गौरव के हाथों में भी लाठी-डंडे और तलवारें थीं। घर में रखे घरेलू सामान को तोड़ दिया गया। बेटी शाइस्ता व सास असगरी ने बीच बचाव किया तो उन्हें भी फेंक दिया गया। बाद में शाइस्ता और दानिश के बयान के आधार पर भीम समेत आठ नाम और शामिल किए गए।
मामले में 17 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप-पत्र कोर्ट में दाखिल किया गया। इसमें से एक आरोपी नोएडा के मॉल में नौकरी करता है। उसके घटना के दौरान गांव में नहीं होने की पुष्टि होने पर उसको अलग कर दिया गया। एक नाबालिग को तीन दिन पहले ही हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। मामले के सोलह आरोपी फिलहाल जेल में हैं।