दिल्ली हाईकोर्ट ने बिंदापुर में व्यवसायी मनोज राणा की हत्या मामले में शुक्रवार को गृह मंत्रालय, पुलिस आयुक्त व पूर्व थानाध्यक्ष को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
अदालत ने तीनों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया जाए।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने राणा की पत्नी ऋषी राणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया है। याचिका में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जांच सीबीआई के सुपुर्द करने का आग्रह करते हुए पुलिस पर बिंदापुर थानाध्यक्ष किशोर कुमार रेवला को बचाने का आरोप लगाया गया है।
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इतना ही नहीं याचिका में 10 लाख रुपये मुआवजे की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता गौरव बंसल ने आरोप लगाया कि 26 मई को आठ पुलिसकर्मी मनोज को सुबह 10 बजे साथ ले गए। पुलिसकर्मियों ने मनोज की हत्या करके शव को लावारिस फेंक दिया।
लोगों के विरोध के बाद जांच अपराध शाखा को सौंप दी गई, लेकिन अभी तक कोई प्रगति नहीं हो पाई है। इतना ही नहीं पुलिस ने कांस्टेबल स्तर के पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया और थानाध्यक्ष को बचाया जा रहा है जबकि उसी के इशारे पर हत्या की गई है।
कानून व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी पुलिस पर है, लेकिन यदि पुलिस ही गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त हो जाए तो आम लोगों की स्वतंत्रता व जीवन खतरे में पड़ जाता है। ऐसे में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए।