अनवर करीब 50 सदस्यों के गैंग का सरगना है। वह तिहाड़ जेल से ही गैंग को चलाता था। वर्ष 2006 में अनवर और सलीम पहलवान गिरोह में उस समय गैंगवार शुरू हो गई थी, जब सलीम व उसके भाई नईम ने अनवर के साथी इब्राहिम की हत्या कर दी थी।
पुलिस के मुताबिक अनवर एक समय दाऊद के खास रहे फजल उर रहमान का साथी रहा था। फजल से अनवर की मुलाकात जेल में हुई थी। एक बार जेल से पैरोल मिलने के बाद अनवर पानी के रास्ते दुबई गया था और वहां फजल के साथ रहा था।
हालांकि बाद में दोनों में दुश्मनी हो गई थी, क्योंकि फजल ने अनवर के भाई की मुखबिरी मुंबई पुलिस से कर दी थी। मुंबई पुलिस ने अनवर के भाई को मुठभेड़ में मार गिराया था।
उत्तर प्रदेश में कर चुका है कई वारदात
दिल्ली में दक्षिण जिले की एसटीएफ ने दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई वारदातों में शामिल गैंगस्टर अनवर ठाकुर (41) को मंगलवार रात बारापूला से गिरफ्तार कर लिया। इसके पास पुलिस ने .32 बोर की पिस्टल बरामद की।
दिल्ली का दाऊद नाम से कुख्यात अनवर 15 अगस्त को पांडव नगर स्थित घर से फरार हो गया था। अनवर की नईम गिरोह से गैंगवार चल रही थी और अभी तक दोनों गैंग से करीब 24 लोग मारे जा चुके हैं।
जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त प्रमोद कुशवाह ने बताया कि अनवर 5 मई को जेल से एक महीने की पैरोल पर बाहर आया था। उसकी पैरोल दो बार 15-15 दिन के लिए बढ़ाई गई थी। करीब डेढ़ वर्ष पहले उसकी शादी हुई थी। 15 अगस्त को अनवर का पत्नी से झगड़ा हो गया था।
चोरी से शुरू किया जुर्म की दुनिया का सफर
पत्नी के कॉल पर पुलिस वहां पहुंची, लेकिन अनवर फरार हो गया था। उसके घर से पांच स्वचालित पिस्टल, तीन कट्टे और 100 कारतूस बरामद किए गए थे। सूचना मिली थी कि अनवर मेरठ से बारापूला होकर गुड़गांव जाएगा।
एसटीएफ प्रभारी राजेंद्र सिंह की देखरेख में एसआई अरविंद, शशिकांत, विकास व एएसआई आनंद की टीम ने बारापूला पर ऑल्टो कार सवार अनवर को धर दबोचा।
पुलिस के अनुसार अनवर ने सबसे पहले मरठ में चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने इसे गिरफ्तार कर लिया था। बदला लेने के लिए अनवर ने मकान मालिक व उसके दो बेटों की हत्या कर दी थी।
पुलिस के मुखबिर को उतारा मौत के घाट
अनवर ने मेरठ में करीब 15 गंभीर आपराधिक वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद वह बहन के साथ दिल्ली आ गया। यहां उसने तस्लीम, सलीम पिन्नी, अस्लम, इब्राहिम उर्फबदलू, सलीम रोटी और अफरश आदि बदमाशों से हाथ मिला लिया और लूट व हत्या की कई वारदात को अंजाम दिया।
वर्ष 1992 में सदर बाजार पुलिस ने अनवर और इसके साथियों को लूट की साजिश रचते हुए गिरफ्तार किया था। इसने पुलिस को मुखबिरी करने वाले खलील की हत्या कर दी थी। इस मामले में उसे उम्रकैद की सजा हो गई थी।