दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने एम्स की पूर्व निदेशक के 50 वर्षीय बेटे को यूके में रहने वाली एक एनआरआई महिला को ठगने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
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आरोपी की पहचान लॉर्ड मुकुल पॉल तनेजा के रूप में हुई है। आरोपी ने लोन ली हुई लग्जरी कार 10.50 लाख रुपये में पीड़िता को बेच दी।
खुद उसने कार की एक भी किस्त नहीं चुकाई थी। पीड़िता को जब जालसाजी का पता चला तो उसने दिल्ली पुलिस से शिकायत की। छानबीन के बाद पुलिस ने मैफेयर गार्डन, हौजखास निवासी आरोपी को दबोच लिया।
फिल्में भी प्रॉड्यूस कर चुका है आरोपी
मुकुल तनेजा की मां 1989 में एम्स के निदेशक पद से रिटायर हुई हैं। फिलहाल इसके परिवार में मां, पत्नी और दो बच्चे हैं। मुकुल ने मॉर्डन स्कूल वसंतकुंज से 12वीं कक्षा पास की। इसके बाद उसने डीयू से बीबीए किया। बाद में वह एमबीए और एलएलएम करने के लिए लंदन चला गया।
उसने कई किताबें भी लिखी है। उसकी काबिलियत को देखते ब्रिटेन सरकार ने लॉर्ड की डिग्री दी। इसके बाद भारत आकर व्यवसाय करने लगा। राजस्थान के बड़े घराने में शादी होने के बाद जम्मू और कश्मीर में होटल व रिसार्ट में भी रुपया लगाया। यहां भी उसे भारी नुकसान हुआ। बाद में उसे आतंकवादियों से धमकी भी मिली।
उसने कपड़ों का व्यवसाय किया। कई फिल्में प्रोड्यूस की, लेकिन कोई भी नहीं चली। उसके कई बड़ी फिल्मी हस्तियों से संबंध हैं। इसके अलावा उसके कई बड़े नेताओं से भी गहरे संबंध हैं।
कैसे देता था वारदात को अंजाम?
मुकुल ने बताया कि उसने विभिन्न बैंकों से लोन लेकर ऑडी-ए-6, स्विफ्ट डिजायर, सुजुकी कजाशी, रेनौल्ट डस्टर, फोक्सवैगन पोलो व अन्य कारें ली हुई थीं। किसी भी कार का उसने लोन नहीं चुकाया था।
कई बैंकों ने उसका अखबारों में विज्ञापन छपवाकर उसे डिफाल्टर घोषित कर रखा था। आरोपी इन्हीं कारों को बेचने के लिए अखबारों में आकर्षक विज्ञापन देता था। खरीदार को देहरादून से वीआईपी नंबर की आरसी बनवाने का झांसा देता था।
पीड़िता को बताया जाता था कि कार पर कोई लोन नहीं है। रुपये लेने के बाद आरसी बनवाने की बात कहता, मगर बाद में धमकी देकर चुप करा देता था।
कैसे फंसा पुलिस की चंगुल में?
अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि यूके की रहने वाली एनआरआई महिला निशा कड़ावाधरा ने यूके के एक सांसद के जरिए दिल्ली पुलिस से शिकायत की थी। शिकायत में बताया कि उसे भारत में एक कार की जरूरत थी।
उसने भारत आकर अखबार में एक कार का विज्ञापन देखा। विज्ञापन देने वाले शख्स ने खुद को यूके का नामी व्यक्ति बताते हुए अपनी खुद की वीआईपी नंबर की कार बेचने की बात की। फोर्ड ईको कार का सौदा 10.50 लाख में तय हुआ।
आरोपी ने उत्तराखंड में देहरादून आरटीओ ऑफिस से निशा के नाम कार को ट्रांसफर कराने की बात कही। रुपये देने के बाद आरोपी ने आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिकेट) नहीं दी। बार-बार टालता रहा।
... तो अब ये भी करने लगा था वो
महिला के अनुसार आरोपी ने दबाव देने पर आरोपी ने उसे धमकाना शुरू कर दिया। परेशान महिला ने खुद ही आरटीओ ऑफिस में छानबीन करवाई। उसे पता चला कि कार पंजाब नेशनल बैंक से फाइनेंस हुई है।
कार आरोपी मुकुल पॉल के नाम ही है। आरोपी ने कार की कोई किस्त नहीं दी है। ठगे जाने का एहसास होने पर पीड़िता ने मामले की शिकायत पुलिस से की।
छानबीन के बाद पुलिस ने आरोपी को बृहस्पतिवार को मुनिरका मार्केट से दबोच लिया।
शुरुआत में आरोपी ने खुद को बड़ा और इज्जतदार आदमी बताकर पुलिस को घुमाने का प्रयास किया, लेकिन सख्ती से पूछने पर आरोपी ने अपना अपराध कबूल कर लिया।
आरोपी ने बताया कि उसने अलग-अलग लोन लेकर कई गाड़ियों को फाइनेंस करा रखा था। किसी भी कार की वह किस्त नहीं देता था। इसके अलावा वह लोगों को ये गाड़ियां बेच दिया करता था।
आरोपी ने बताया कि उसने हौजखास के अपने बंगले को गिरवी रखकर 70 लाख रुपये लोन भी लिया हुआ है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।