बृहस्पतिवार देर रात कार और कैंटर की भिड़ंत ने रण सिंह रावत का पूरा परिवार उजाड़ दिया। यामाहा फैक्टरी में काम करने वाले रण सिंह रावत ने कड़े परिश्रम के बाद परिवार को गांव शाहपुर कलां से त्रिखा कॉलोनी तक पहुंचाया।
पढ़ाई के साथ दोनों बच्चों के स्वरोजगार भी खुलवाया दिया। लेकिन सब खत्म हो गया। अपने दो बेटों की मौत से मुरझाया रण सिंह कहने लगा, मैं आज मर गया। ऐसी क्या गलती हो गई, जिसका सजा आज भुगतनी पड़ रही है।
घर के अंदर मां अंजु अपनी नवविवाहिता बहुओं को सीने से लगाकर रो रही थीं। अंजु बार-बार अपने बेटे लक्की और विक्की को पुकार रहीं थी। रिश्तेदार अंजु को दुख की घड़ी में संभाल रहे थे।
चार महीने पहले घर से निकली बेटों की बारात
दर्दनाक हादसा
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परिवार ने कभी सोचा भी नहीं था कि चार महीने पहले जिस घर की दहलीज से दोनों बेटों की बारात निकली थी, आज उनकी अर्थियां उठेंगी। इस साल 22 फरवरी को घर से बड़े बेटे लोकेंद्र प्रताप की बारात दिल्ली स्थित जनकपुरी गई थी।
इसके बाद दो मार्च को छोटे बेटे विनय की शादी हुई, जिसकी बारात पलवल के भड़ौली गई थी। शादी की खुशियां अब तक परिवार में मनाई जा रही थीं। रिश्तेदारों का आनाजाना बंद नहीं हुआ था कि अचानक हुए हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया। उधर, बुआ संता का रो-रोकर बुरा हाल था।
संता कहने लगी, मैंने रोका था दोनों को। लेकिन सुबह दुकान खोलने की बात कह दोनों वापस जाने की जिद कर रहे थे। अंतिम संस्कार के बाद घर में बैठे हर रिश्तेदार के आंखों में आंसू थे और सभी कह रहे थे, ऐसा किसी और के साथ न हो।