रियो पैरा ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता वरुण भाटी के पिता हेम सिंह भाटी के बैंक एकाउंट से एक युवक ने फर्जी हस्ताक्षर कर रुपये दूसरे खाते में (आरटीजीएस) ट्रांसफर कराने की कोशिश की। बैंक अधिकारियों की सजगता से रुपयेे नहीं निकल पाए और पकड़े जाने के डर सेे आरोपी बैंक से भाग निकला।
लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। आरोपी नेे चेक को चबाकर साक्ष्य नष्ट करने की भी कोशिश की, लेकिन पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 5.30 लाख, 55 हजार और 45 हजार के तीन चेक बरामद किए हैं। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है।
शहर के सेक्टर चाई-फाई निवासी रियो पैरा ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता वरुण भाटी के पिता और पूर्व प्रधान हेमसिंह भाटी का कॉमर्शियल बेल्ट स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में एकाउंट है। शनिवार दोपहर दो बजे एक युवक बैंक में पहुंचा।
युवक ने 5.30 लाख, 55 हजार और 45 हजार के तीन चेक आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रास सेटलमेंट यानि रुपये नेट बैंकिंग से ट्रांसफर का तरीका) के लिए लगा दिए। बताया गया है कि आरटीजीएस भंगेल निवासी एक व्यक्ति के खाते में कराया जा रहा था।
बैंक कर्मियों ने चेक प्रबंधक के पास भेज दिया। चेक पर किए हस्ताक्षर का मिलान नहीं हुआ। वहीं, प्रबंधक को ध्यान आया कि हेमसिंह भाटी को अगर रुपये निकलवाने होते हैं, तो वह पहले उन्हें फोन करते हैं।
इसके चलते उन्हें आरोपी पर शक हो गया और उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दे दी और कर्मचारियों से युवक को रोककर रखने के लिए कहा। पकड़े जाने की भनक लगने पर आरोपी बैंक से भाग निकला।
बैंक कर्मियों के शोर मचाने पर लोग आरोपी के पकडने दौड़ पड़े और कुछ ही दूरी पर जाकर आरोपी को दबोच लिया। आरोपी ने साक्ष्य नष्ट करने के इरादेे से चेेकों को मुंह में डालकर चबाने की कोशिश की लेेकिन लोगों ने उसेे ऐसा नहीं करने दिया। बैंक कर्मियों ने पकड़े गए आरोपी को पुलिस को सौंप दिया।
घटना की जानकारी होने पर हेम सिंह भाटी भी कासना कोतवाली पहुंचे और उन्होंने भी आरोपी सेे पूछताछ की। आरोपी पुलिस व हेमसिंह भाटी को गुमराह कर रहा था।
पुलिस को आरोपी ने जानकारी दी कि वह मेरठ निवासी अनीस है, जबकि हेमसिंह भाटी को वह सिकंदराबाद निवासी बता रहा था। पुलिस आरोपी से गहनता से पूछताछ कर रही है।
आरोपी तक कैसे पहुंची हेमसिंह भाटी की चेकबुक?
हेम सिंह भाटी ने दो माह पहले बैंक से चेक जारी करने की मांग की थी। कई दिन बाद भी जब चेकबुक उन्हेें नहीं मिली, तो उन्होंने बैंक से संपर्क किया। बैंक ने चेकबुक उन्हें भेजने की जानकारी दी, तो उन्होंने चेकबुक गुम होने की शिकायत देकर दूसरी चेकबुक जारी करा ली।
पकड़े गए आरोपी ने रुपये ट्रांसफर कराने के लिए इसी चेकबुक के चेक का इस्तेमाल किया। अब, सवाल यह उठता हैै कि चेकबुक हेमसिंह भाटी के पास पहुंचने के बजाय आरोपी तक कैसे पहुंच गया? कहीं कोई बैंक कर्मी या अन्य इस साजिश में शामिल तो नहीं है?
युवक को फर्जी हस्ताक्षर कर दूसरे व्यक्ति के खाते सेे रुपये निकालने की कोशिश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है। आरोपी खुद को मेरठ निवास अनीस बता रहा है। यह भी पता लगानेे का प्रयास किया जा रहा है कि उसके पास चेकबुक कैसे पहुंची।
सुधीर त्यागी, कोतवाली प्रभारी, कासना