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अपने ही घर में सुरक्षित नहीं दिल्ली की महिलाएं

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दिल्ली पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि राजधानी सुरक्षित नहीं है। दिल्ली में वर्ष 2013 के मुकाबले 2014 में आईपीसी के तहज दर्ज होने वाले अपराध में करीब 100 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सबसे ज्यादा 458.77 फीसदी लूटपाट की घटनाएं बढ़ी हैं।
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साथ ही डकैती, झपटमारी, छेड़छाड़ और घर में चोरी की घटनाओं में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। छेड़छाड़ के मामलों में 25 फीसदी की वृद्धि हुई है। हालांकि, दिल्ली पुलिस के आंकडे़ बताते हैं कि घर भी महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है।

राजधानी में 96 फीसदी रेप के मामले में आरोपी पीड़िता का परिचित व रिश्तेदार था, जबकि चार फीसदी मामलों में अनजान व्यक्ति ने रेप की वारदात को अंजाम दिया। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी भी तरह के अपराध में कमी नहीं आई है और इनकी गिनती एक लाख से ज्यादा हो गई है।
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70% मामले नहीं सुलझा पाई पु‌लिस

एक तरफ जहां राजधानी में अपराध में खासकर स्ट्रीट क्राइम में बेतहाशा वृद्धि हुई है, वहीं वारदात को सुलझाने में भी पुलिस पीछे रह गई। वर्ष 2013 में मामलों को सुलझाने का दिल्ली पुलिस का ग्राफ 48.86 फीसदी था।

वहीं, 2014 में पुलिस सिर्फ 29.50 मामलों को ही सुलझा पाई है। दिल्ली पुलिस का यह डाटा सुकून देने वाला है कि पुलिस ने महिलाओं के प्रति हुई वारदातों में अपराधियों को एक सप्ताह में पकड़ने का ग्राफ ज्यादा है।

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2014 में 1,47,230 से ज्यादा अपराध दर्ज किए गए। वहीं, 2013 में कुल 73,902 मामले दर्ज हुए थे यानी वर्ष 2013 के मुकाबले 2014 में अपराध में 99.22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

जानकारों की मानें तो यह बढ़ोतरी बहुत ज्यादा है। वर्ष 2012 के मुकाबले 2013 में सिर्फ 44 फीसदी क्राइम बढ़ा था। वसंत विहार गैंग रेप के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस ने कई कदम उठाए।

इसके बावजूद महिलाओं के प्रति अपराध कम नहीं हुआ। पुलिस आयुक्त ने कहा कि अब मोबाइल ऐप हिम्मत के साथ एक चीज और जोड़ी जा रही है। महिला जब टैक्सी में बैठेगी तो वह उसके नंबर प्लेट की फोटो हिम्मत पर भेज देगी।

रियर अंडर रन प्रोटेक्शन डिवाइस नहीं तो होगी सख्त कार्रवाई

कार या बाइक सवार ट्रकों या हल्के व्यावसायिक वाहनों के पीछे घुसकर कार हादसों का शिकार न हों, इसको लेकर दिल्ली पुलिस ज्यादा सख्त हो गई है।

पुलिस आयुक्त के मुताबिक दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने वाले या राजधानी में चलने वाले उन हल्के और भारी व्यावसायिक वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिनमें आरयूपीडी (रियर अंडररन प्रोटेक्शन डिवाइस) और एलयूपीडी (लेटरो अंडररन प्रोटेक्शन डिवाइस) नहीं होगी।

हालांकि यह नियम पुराना है, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है। पुलिस आयुक्त के मुताबिक 2015 में इस पर खास मुहिम चलाई जाएगी।

पुलिस को बताएंगे मीडिया का महत्वपुलिसकर्मियों को अब ट्रेनिंग के दौरान मीडिया के महत्व और उनकी इज्जत करने के बारे में भी बताया जाएगा। पुलिस आयुक्त से जब पूर्वी दिल्ली में थानाध्यक्ष द्वारा मीडियाकर्मीं की पिटाई पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अब ट्रेनिंग के दौरान मीडिया का इतिहास और मीडिया की उपयोगिता के बारे में बताया जाएगा।

...तो आप टिक-टेक करो

शुक्रवार को हुई दिल्ली पुलिस की सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयुक्त बीएस बस्सी काफी अच्छे मूड में दिखाई दिए। आयुक्त के तैयार किए गए माहौल पर पत्रकारों के सवाल भी वैसे ही आए। ऐसे कई मौके आए जबकि पुलिस के आला अधिकारियों और पत्रकारों के ठहाके ऑडिटोरियम में गूंजे।

किसी भी योजना का जिक्र करने से पहले उससे संबंधित अधिकारी का नाम लेते हुए पुलिस आयुक्त ने पत्रकारों से कहा कि वे सीधे इनसे टिक-टेक करें। उनके पास से आपको कुछ नहीं मिलेगा।

वार्ता शुरू होते ही सीपी ने कहा कि हमें काफी तैयारी करने के बाद आपके सामने आना पड़ता है। वार्षिक रिपोर्ट देते हुए जब आंकड़ों की स्लाइड चलाते हुए सीपी ने आगे बढ़ने को कहा तो स्क्रीन पर धन्यवाद लिखकर आ गया, इस पर वहां ठहाके गूंज उठे जिस पर आयुक्त बोले कि लगता है कुछ ज्यादा जल्दी खत्म हो गया।

ड्रग्स का काला बढ़ा कारोबार बढ़ा

देश में बीते वर्षों की तुलना में ड्रग्स का काला कारोबार तेजी से बढ़ा है। पिछले आठ सालों की तुलना की जाए तो वर्ष 2014 में हेरोइन और स्मैक सबसे ज्यादा बरामद की गई। बड़े पैमाने पर कुवैत, अफगानिस्तान और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के रास्ते ड्रग्स भारत आ रहा है। बाद में दक्षिण भारत के रास्ते इन ड्रग्स को यूरोपीय देशों में भेजकर मोटा पैसा कमाया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस आम से जुड़ने के हर संभव प्रयास कर रही है। शुक्रवार को वार्षिक प्रेसवार्ता में पुलिस आयुक्त ने जल्द ही युवा प्रहरी योजना शुरू करने का ऐलान किया। बस्सी के मुताबिक दिल्ली के सभी इलाकों में इस योजना को शुरू करने की तैयारी चल रही है। इसके तहत युवाओं को इलाके की पीसीआर से जोड़ा जाएगा।

पकड़ी गई ड्रग्सड्रग्सबरामदहेरोइन 133.68 कि.ग्राकोकीन 4 कि.ग्राअफीम 39 कि.ग्रागांजा 1681 कि.ग्राएफेडरीन 72 कि.ग्राएलएसडी 1200 स्टांप पेपरवर्ष 2014 के आंकड़ेगिरफ्तार हुए 392विदेशी नागरिक 16

दोगुने अपराधों के पीछे हथियार बड़ी वजह

राजधानी में 2013 के मुकाबले 2014 में अपराध दोगुने हो गए हैं। इसके लिए हथियारों का आसानी से उपलब्ध होना बड़ा कारण माना जा रहा है। बिहार के मुंगेर, मध्य प्रदेश के धार और खरगोन से बड़े पैमाने पर 2014 में ऑन डिमांड हथियार आए।

गाड़ी चलाते समय मोबाइल के इस्तेमाल पर रहेगी पैनी नजरराजधानी में सड़क हादसों में होने वाली मौत के आंकड़ों को कम करने के लिए दिल्ली पुलिस ने सख्त कदम उठाने का फैसला लिया है। पुलिस आयुक्त की मानें तो वर्ष 2015 में लेन ड्राइविंग और गाड़ी चलाने के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

खास तौर से रात के समय लोकल पुलिस के अलावा ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी बढ़ाकर नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आयुक्त ने बताया कि पुलिस की सख्ती का ही नतीजा है कि वर्ष 2013 के मुकाबले 2014 में सड़क हादसों से मौत के आंकड़ों में कमी आई है। सीपी के मुताबिक, नियम तोड़ने वाले वाहनों पर नजर रखने के लिए पुलिस की दृश्यता बढ़ाने के अलावा सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी है।

बीते दो साल के अपराध के आंकड़ेअपराध (15 दिसंबर तक)डकैती--3178151.6183.33हत्या--48656115.4375.76हत्या का प्रयास--56474532.0986.04रॉबरी--11066180458.7746.12अपहरण (फिरौती)--283732.1483.78दुष्कर्म--1571206931.7080.57झपटमारी--33166944109.4125.96छेड़छाड़--3345417924.9367.17चोट पहुंचाना--1704196415.2671.33चोरी (घर में)--287012276327.7411.04वाहन चोरी--138952222359.9411.47अन्य चोरी--1030239570284.1012.10अन्य मामले--346845040445.3245.72
कुल दर्ज मामले 7390214723099.2229.50
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ऐप कमिश्नर बने बीएस बस्सी

बदलते दौर में पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी ने दिल्ली पुलिस को हाईटेक कर दिया। 2014 में पुलिस आयुक्त ने कुछ ऐसे ऐप लॉन्च किए, जिसने उन्हें ऐप कमिश्नर का ही नाम दे दिया। हालांकि कुछ पत्रकारों के ऐप कमिश्नर कहने पर सीपी ने खुद को जनता का सेवक बताया।

बस्सी ने 2014 में लॉस्ट रिपोर्ट ऐप, ट्रैफिक पुलिस ऐप, पीसीसी ऐप के बाद हिम्मत ऐप शुरू कर राजधानीवासियों को एक के बाद एक तोहफे दिए। इससे न सिर्फ पुलिस की सिरदर्दी कम हुई, बल्कि आम आदमी को भी आसानी हुई।

पुलिस आयुक्त ने घोषणा की है कि जल्द ही वह ऑटो थेफ्ट मोबाइल ऐप भी शुरू करने जा रहे हैं। वर्ष 2014 की शुरुआत में 24 फरवरी को सीपी ने मोबाइल ऐप फॉर लॉस्ट रिपोर्ट शुरू किया। इसके तहत किसी भी तरह के खोए हुए सामान की रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज होने लगी। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस मोबाइल ऐप आया।

इस पर समय-समय पर ट्रैफिक एडवाइजरी, टैक्सी, टीएसआर, रेडियो कैब चालकों की शिकायत या ओवर चार्ज की शिकायत की सकती है। पीसीसी यानी पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के तहत वीजा या नौकरी के पुलिस वेरीफिकेशन ऑनलाइन हो सका। इसके अलावा 2015 की शुरुआत में ही हिम्मत नामक ऐप शुरू कर महिलाओं को सुरक्षा प्रदान की।
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