संकट के सिपाही डटकर मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। एक ऐसे ही सिपाही हैं एनआईसी प्रभारी भास्कर पांडेय। उनकी ड्यूटी जरूर एनआईसी में है, लेकिन काम इतना बढ़ गया है कि घर जाना मुश्किल हो गया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की तैयारियों से लेकर जिले के कंट्रोल रूम की ऑनलाइन व्यवस्था उन्हीं के जिम्मे है।
भास्कर बताते हैं कि वह बीमार हैं, डॉक्टर ने बैठने के लिए मना कर दिया है। छुट्टी पर जाने ही वाले थे कि कोरोना संक्रमण फैल गया। ऐसे में उन्होंने ड्यूटी पर डटकर रहने को ही प्राथमिकता दी। एनआईसी में सरकारी अधिकारियों के अलावा सामाजिक लोगों को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए बुलाया जाता है। वह चाहते हैं कि देश सेवा का जो अभियान चल रहा है, उसमें सहयोग किया जाए, इस कारण वह ड्यूटी पर डटे हुए हैं।
(भास्कर पांडेय, एनआईसी प्रभारी, बागपत )
कोरोना से इस युद्ध में अपनी कला के माध्यम से लोगों में जागरूकता फैला रहे शारदा प्रसाद साहू मानते हैं कि एक अच्छा संदेश यदि लोगों के जेहन में बैठ गया तो वह उसे हमेशा याद रखते हैं। रंगों का डिब्बा और हाथों में तूलिका लेकर शारदा शहर की दीवारों पर कोरोना से बचने के संदेश लिखते हैं। ऐसे करने के लिए न तो उन्हें कोई वित्तीय सहायता मिलती है, न ही सरकारी धन। वह मन से इस लड़ाई में कूदे हैं। कड़ी धूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। शहर में 50 से ज्यादा स्थानों पर जागरूकता भरे संदेश लिख चुके हैं, ताकि जिसकी भी नजरें पडे़ जागरूक हों।
महिला कांस्टेबिल क्षमा यादव कोतवाली हाथरस गेट में तैनात हैं। ड्यूटी के साथ-साथ कोरोना योद्धा की तरह लोगों की मदद कर रही हैं। अक्सर वह गरीबों को खाना बांटती देखी जा सकती हैं। यही नहीं ड्यूटी के दौरान क्षमा यादव के हाथों में जागरुकता का संदेश देने वाला पोस्टर होता है। इससे वह लोगों को कोरोना से बचाने का संदेश देती हैं। क्षमा यादव अविवाहित हैं और उनकी छोटी बहन भी उनके साथ ही रहती हैं। उन्होंने अपनी छोटी बहन को भी इस मुहिम में अपने साथ जोड़ रखा है। अपनी बड़ी बहन की तरह की क्षमा की छोटी आकांक्षा भी स्लोगन के माध्यम से कोरोना व लॉकडाउन को लेकर जागरुकता फैला रही हैं। (क्षमा यादव, हाथरस)
कैंसर, किडनी, मधुमेह समेत विभिन्न रोगियों की प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से इन्हें कोरोना वायरस का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. अंशुल गोयल ने कैंसर रोगियों के लिए विशेष डाइट चार्ट बनाया है। ताकि, कैंसर रोगियों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी रहे। इसके अलावा वह कोरोना संदिग्ध कैंसर रोगियों की मोबाइल से ही स्क्रीनिंग करते हैं। किसी में भी लक्षण दिखता है तो उसे अस्पताल में भर्ती करवाते हैं। लॉकडाउन होने के कारण कीमोथैरेपी के लिए मुंबई, दिल्ली, कानपुर, लखनऊ जाने वाले मरीज अब झांसी मेडिकल कॉलेज आ रहे हैं। चूंकि, कीमोथैरेपी कराने के दौरान बीमारी से लड़ने की क्षमता कई गुनी कम हो जाती है। ऐसे में कैंसर रोगियों के कोरोना की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है। डॉ. अंशुल गोयल ने कैंसर रोगियों के लिए विशेष डाइट चार्ट बनाया है। इसमें नियमित हल्दी डालकर दूध पीने, तुलसी का सेवन करने, नींबू डालकर गुनगुना पीने, फलों को अच्छे से धुलकर खाने समेत कई सुझाव दिए गए हैं। ताकि, कैंसर रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी न आए। (डॉ. अंशुल गोयल, मेडिकल कॉलेज झांसी)
लॉकडाउन में सिर पर भले ही मुसीबतों का पहाड़ टूटा हो लेकिन फर्ज के आगे यह पहाड़ भी तिल के बराबर लगता है। कोतवाली में तैनात एटा निवासी सिपाही पवन कुमार की वृद्ध मां 28 मार्च को बाथरूम में गिर गईं थीं। हादसे में उनकी कमर में गंभीर चोट आई है। पवन के पिता का देहांत हो चुका है, बड़ा भाई उन्नाव में दरोगा की ट्रेनिंग कर रहा है। घर पर बेबस मां की मदद करने वाला कोई नहीं था। मददगार पड़ोसियों ने पवन को इस घटना की जानकारी दी। वृद्धा का इलाज कराया। पवन कहते हैं, मैं फोन पर मां से हालचाल ले लेता हूं। अब वह बेहतर हैं। उनकी सेहत का ख्याल हर समय मेरे मन में रहता है लेकिन ड्यूटी तो ड्यूटी है। (पवन कुमार, कांस्टेबल, इटावा)