राजधानी में कोरोना वायरस के संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली सरकार ने फैसला लिया है कि सोमवार से लॉकडाउन में कोई ढील नहीं दी जाएगी। मौजूदा पाबंदियां अगले एक हफ्ते तक जारी रहेंगी। 27 अप्रैल को दिल्ली सरकार हालात की समीक्षा करेगी। इसके आधार पर आगे का फैसला किया जाएगा।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को बताया कि दिल्ली में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। दिल्ली की आबादी देश की कुल आबादी का दो फीसदी होने के बावजूद कुल मरीजों के 12 फीसदी यहीं हैं। यही नहीं, हर रोज इनकी संख्या बढ़ रही है। केजरीवाल ने माना कि लॉकडाउन से आम दिल्लीवालों को होने वाली परेशानियों से सरकार परिचित है, लेकिन दिल्ली के हालात बेहद संजीदा है।
विदेश से आने वाले सबसे ज्यादा यात्री दिल्ली में आए। इससे संक्रमण बढ़ा। फिर, मरकज की सबसे ज्यादा मार दिल्ली पर पड़ी है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण सभी वर्गोँ को भारी परेशानी हो रही है। सरकार ढील देना चाहती है, लेकिन इससे हालात खराब हुए तो मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा होने से उनको आईसीयू में भर्ती कर पाना, वेंटिलेटर पर रख पाना संभव नहीं होगा।
केजरीवाल के मुताबिक, ढिलाई देने पर हालात बेकाबू होते हैं तो सरकार खुद को माफ नहीं कर पाएगी। ऐसी स्थिति में फैसला लिया गया है कि फिलहाल लॉकडाउन में कोई ढील नहीं दी जाएगी। एक हफ्ते बाद जमीनी हालात की समीक्षा होगी। इसके आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।
हर रोज बढ़ रहे हॉटस्पॉट
केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली में संक्रमण तेजी फैलना चालू हो गया है। हर रोज कंटेनमेंट जोन बढ़ते जा रहे हैं। फिलहाल इनकी संख्या 79 है। इनमें रैंडम टेस्टिंग करवाई गई है। पता चला है कि जहां लोगों ने नियमों का पालन किया, वहां संक्रमण के मामले नहीं आए। लेकिन जहां लोग नहीं माने वहां संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं। मसलन, जहांगीरपुरी की एक गली में एक ही परिवार के 31 लोग संक्रमित मिले।
लॉकडाउन नहीं होता तो कम पड़ जाते संसाधन
केजरीवाल ने बताया कि शनिवार तक दिल्ली में कोरोना संक्रमण के 1893 केस सामने आ चुके हैं। इनमें से 26 आईसीयू व 6 वेंटिलेटर पर हैं, जबकि 44 लोगों की मौत हो गई है। ऐसे में सोचने की जरूरत है कि लॉकडाउन न होता तो क्या होता। संक्रमित लोगों की संख्या और तेजी से बढ़ती। करीब 3000 लोगों को आईसीयू की जरूरत होती और 2000 लोगों को वेंटिलेटर पर रखना पड़ता। दिल्ली में तो इतने संसाधन ही नहीं है। इटली, स्पेन, अमेरिका में यही हो रहा है। वहां अस्पतालों के बाहर लोग पड़े हैं। लॉकडाउन नहीं होता तो यहां भी ऐसी स्थिति होती।