दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से पेश अधिवक्ता मोहिंदर रूपल ने अदालत को बताया कि बुधवार को चुनाव प्रचार समाप्त हो गया था। हालांकि, पीठ ने कथित उल्लंघनों को दर्शाने वाली तस्वीरों को लेकर अधिकारियों से सवाल किए। अदालत ने कहा, 'क्या आपने तस्वीरें देखी हैं? यह आदेश का स्पष्ट उल्लंघन है।'
प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
अदालत ने सवाल किया कि क्या विश्वविद्यालय का स्थिति और कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण है। पीठ ने कहा कि यदि अधिकारी स्थिति को नियंत्रित नहीं कर सकते या अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित नहीं कर सकते, तो उन्हें ऐसा बता देना चाहिए। इसके बाद अदालत चुनाव छोड़ने पर विचार करेगी। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि वह अदालत से पूरी तरह सहमत हैं। उन्होंने कथित आचरण को "पूरी तरह निंदनीय" बताया और कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव के संबंध में अदालत में पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ने कहा कि अधिकारी शुक्रवार सुबह 10:30 बजे अदालत में पेश होकर यह साबित करेंगे कि याचिकाकर्ता द्वारा उजागर की गई घटनाओं को छोड़कर, इस वर्ष के चुनाव पिछले चुनावों की तुलना में 85-90% बेहतर थे। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि कार्रवाई की जाएगी।
एएसजी और याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत मनचंदा ने अदालत में लाए गए एक घायल कानून के छात्र की पहचान पर भी विवाद किया। इसके बाद पीठ ने चेतावनी दी, 'यह कोई तमाशा नहीं है। कृपया इन सब में शामिल न हों।'
एएसजी ने कहा कि एक शिक्षक पर कथित हमले में शामिल व्यक्ति की गिरफ्तारी के संबंध में आश्वासन दिया जाएगा, और यह भी जोड़ा कि संबंधित छात्र को लॉ सेंटर-I मामले में निष्कासित कर दिया गया था।
मनचंदा ने कहा कि उनका इंस्टाग्राम छात्रों और शिक्षकों के संदेशों से भरा पड़ा था, जिसमें चुनाव संबंधी घटनाओं के दौरान बंदूकें लहराए जाने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा कि तस्वीरें वास्तविक थीं और इसीलिए उन्होंने अदालत का रुख किया था। इस दावे पर कि इस साल चुनाव बेहतर थे, उन्होंने कहा, 'अगर यह बेहतर है, तो भगवान ही मालिक है।'