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औद्योगिक घराने बाहर से खरीद सकेंगे बिजली

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बाहर से बिजली खरीद योजना (ओपन एक्सेस) मामले में दिए गए अपने एक आदेश को लेकर राज्य सरकार बैकफुट पर आ गई है। दूसरे प्रदेशों से बिजली खरीदने पर सरकार ने पिछले दिनों रोक लगा दी थी।
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फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एफआईए) एवं कुछ उद्योगपतियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगाकर अगली सुनवाई तक पुरानी स्थिति बहाल रखने को कहा है। सरकार ने कहा था कि उद्योगपति बाहरी बिजली उस वक्त खरीदते हैं जब उन्हें जरूरत होती है। यह शॉर्ट टर्म खरीद है।

अगर उन्हें बाहर से बिजली खरीदनी भी है तो लांग टर्म (लंबी अवधि) के लिए खरीदें। शॉर्ट टर्म में उद्योगपति अपने एक माह की जरूरत और बिजली लेने का समय बताते हैं, जबकि लांग टर्म में उन्हें तीन माह की बिजली की जरूरत और आपूर्ति का समय बताना होगा।
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उद्योगपतियों को राहत तो निगम को होगा नुकसान

राज्य सरकार द्वारा शॉर्ट टर्म खरीद पर रोक लगाने के बाद कुछ औद्योगिक घरानों और एफआईए ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिस पर न्यायाधीश रितु बाहरी ने पुरानी स्थिति बहाल रखने के आदेश देते हुए अगली सुनवाई 8 जुलाई तय कर दी है।

इस आदेश के बाद बाहर से बिजली खरीदने वाले पूरे प्रदेश के 230 औद्योगिक घरानों को राहत मिली है। एफआईए के कार्यकारी निदेशक कर्नल शैलेंद्र कपूर का कहना है कि बाहर से बिजली का अधिकार विद्युत एक्ट 2003 के तहत मिला हुआ है। उद्योगपति बाहर से बिजली खरीद रहे हैं तो बिजली निगम को घाटा हो रहा है।

यही कारण है ‌कि नई-नई चाल चलकर निगम इस एक्ट का ही उल्लंघन करने में जुटा हुआ है। एक तरफ बिजली निगम के पास बिजली नहीं है तो दूसरी ओर वह उद्योगपतियों को अपनी ही महंगी बिजली खरीदने का दबाव बना रहा है। ऐसे में उद्योग जगत को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
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कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

इस योजना के तहत राज्य के बाहर से बिजली खरीदने वाली कंपनियों को हर माह बिजली निगम से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेनी पड़ती है।

कुछ दिनों से एनओसी नहीं मिल रही थी। इसी दौरान सरकार ने बाहर से बिजली खरीद पर ही रोक लगा दी।

दूसरे राज्यों से उद्योगपतियों को लगभग 4-5 रुपये प्रति यूनिट के रेट पर बिजली मिल रही है, जबकि हरियाणा सरकार उन्हें पीक आवर में लगभग 11 रुपये यूनिट तक बिजली देती है।
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