सड़कों पर महिलाओं और बच्चियों के साथ हो रही अपराध की संगीन घटनाएं उन्हें असुरक्षित बना रही हैं और उनकी आजादी के अधिकारों का हनन कर रही हैं। एक मासूम बच्ची के अपहरण और दुष्कर्म से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह टिप्पणी की।
अदालत ने 13 साल की बच्ची के अपहरण और दुष्कर्म के एक दोषी को उम्रकैद और दूसरे को 10 साल की कैद की सजा सुनाई है। कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गुरदीप सिंह ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि नाबालिगों के साथ दुष्कर्म जैसी घटनाओं को अंजाम देने वाले अपराधी रहम के हकदार नहीं हैं।
ऐसी घटनाओं से दिल्ली की सड़कों पर महिलाओं और बच्चियां असुरक्षित हैं, जिसकी वजह से वह अपने घरों से अकेले बाहर भी नहीं निकल सकती। इन घटनाओं के कारण उनके आजादी के मौलिक अधिकार का भी हनन हो रहा है।
ऐसे संगीन अपराध पीड़ितों के पूरे जीवन को प्रभावित करते हैं, जिसकी वजह से पूरे समाज के विवेक को सदमा लगता है। पीड़ित पक्ष के मुताबिक 9 फरवरी 2012 को 13 वर्षीय मासूम बच्ची अपने घर में पास खेल रही थी।