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Delhi HC: कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में अल्पसंख्यक छात्रों की शुल्क वापसी संबंधी फैसले पर सरकार से मांगा जवाब

Tue, 06 Sep 2022 07:41 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

अदालत ने इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याची ने तर्क दिया कि प्रतिपूर्ति के लिए लागू योजना के अनुसार यह केवल अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों के लिए उपलब्ध है और जो व्यक्ति निम्न आय वाले परिवारों से संबंधित हैं, उन्हें उनके धर्म और जाति के आधार पर पूरी तरह से बाहर रखा गया है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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दिल्ली के मान्यता प्राप्त पब्लिक स्कूलों में कक्षा एक से बारहवीं के बीच पढ़ने वाले अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को ट्यूशन फीस और अन्य अनिवार्य शुल्क की प्रतिपूर्ति देने संबंधी दिल्ली सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। अदालत ने इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के अलावा दिल्ली के शिक्षा निदेशालय और दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग से भी जवाब मांगा है। पीठ ने मामले की सुनवाई 13 दिसंबर तय की है। यह जनहित याचिका एक चार्टर्ड अकाउंटेंट अविनाश मल्होत्रा द्वारा दायर की गई है।

योजना के अनुसार अल्पसंख्यक छात्र जिनकी पारिवारिक आय तीन लाख रुपये प्रति वर्ष से कम है वे दिल्ली में मान्यता प्राप्त पब्लिक स्कूलों में ट्यूशन फीस और अन्य अनिवार्य शुल्क की प्रतिपूर्ति प्राप्त करने के लिए पात्र हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह नीति भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन है, क्योंकि यह निम्न आय वाले परिवारों के सभी छात्रों को लाभ नहीं प्रदान किया गया।
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याची ने तर्क दिया कि प्रतिपूर्ति के लिए लागू योजना के अनुसार यह केवल अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों के लिए उपलब्ध है और जो व्यक्ति निम्न आय वाले परिवारों से संबंधित हैं, उन्हें उनके धर्म और जाति के आधार पर पूरी तरह से बाहर रखा गया है। याची ने कहा, वर्तमान नीति के तहत अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित एक छात्र जिसकी वार्षिक पारिवारिक आय 2,95,000 रुपये है, वह ट्यूशन फीस की वापसी के लिए पात्र होगा। 

लेकिन एक छात्र जिसकी वार्षिक पारिवारिक आय एक लाख रुपये है, लेकिन वह अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित नहीं है वे धनवापसी के हकदार नहीं होंगे। ऐसे में यह नीति अन्यायपूर्ण और स्पष्ट रूप से मनमानी है। याची ने इस नीति को तुंरत रद्द करने का निर्देश देने का आग्रह किया क्योंकि यह धर्म विशेष पर आधारित है। याची ने अदालत से आग्रह किया कि दिल्ली सरकार को सभी निम्न आय वाले परिवारों को नीति का लाभ प्रदान करने के लिए एक दिशा-निर्देश दिया जाए।

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