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एक लाख के लिए पत्नी को दी शारीरिक यातनाएं

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दहेज लोभ के एक मामले में दिल्ली की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पत्नी को खुश रखना पति की जिम्मेदारी है। इसी के साथ अदालत ने पति, उसके भाई और भाई की पत्नी को दो साल की जेल की सजा फरमान सुनाया।
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तीनों आरोपियों को पीड़ित महिला को पांच-पांच हजार रुपये बतौर मुआवजा देने के भी आदेश दिए। सभी आरोपियों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप था। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट एकता गौबा ने इस मामले में पीड़ित महिला के पति और दोनों रिश्तेदारों को मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना का दोषी पाया।

मजिस्ट्रेट एकता ने कहा कि  पति की जिम्मेदारी है कि वह पत्नी को खुश रखे लेकिन यहां तो पति ने ही पत्नी को प्रताड़ित किया। पति ने अपनी पत्नी को अपने परिवार के दोनों सदस्यों के साथ मिलकर दहेज के लिए परेशान किया।
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आरोपियों को पाया मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का दोषी

जज ने कहा कि और पूरे मामले पर गौर करने के बाद महिला को न्याय मिले इसे सुनिश्चित करने के लिए सभी आरोपियों को दो साल की सजा दी जाती है। पीड़ित महिला ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2000 में शादी होने के महज 15 दिन बाद ही दहेज के लिए उसे घर से बाहर निकाल दिया गया था।

महिला के अनुसार उसके पति ने कहा कि जब तक वह एक लाख रुपये अपने घर वालों से लेकर नहीं आती, तब तक वापस न लौटे। दो वर्षों तक इसी तरह दुर्व्यवहार के बाद महिला ने तंग आकर अपने पति और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
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