दिल्ली की एक अदालत ने एक पति को अपनी पत्नी से रेप के मामले में बरी कर दिया। कोर्ट का कहना है कि पत्नी के साथ जबरदस्ती बनाए गए शारीरिक संबंध को रेप की कैटेगरी में नहीं रखा जा सकता है।
द्वारका कोर्ट में चल रहे एक मामले में एक महिला ने अपने पति पर ही रेप करने का आरोप लगाया था। एडिशनल सेशन जज वीरेंद्र भट्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पति और पत्नी की स्थिति में रेप का मामला नहीं बनता है चाहे पीड़ित की इच्छा और सहमति के बिना ही सेक्स हुआ हो। जिसके बाद रेप के आरोपी पति को अदालत ने बरी कर दिया।
जबरदस्ती शादी करने का भी लगा आरोप
पति पर आरोप लगाते हुए पत्नी ने दावा किया था कि आरोपी विकास मार्च 2013 में उसे बेहोशी की हालत में गाजियाबाद के मैरिज रजिस्ट्रार के दफ्तर ले गया और शादी के कागजात पर साइन करवा लिए।
आरोप था कि बाद में आरोपी ने पीड़ित के साथ रेप किया और फिर उसे छोड़ दिया। महिला ने अक्टूबर 2013 में पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई।
अदालत ने इस मामले में 7 मई को अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि शिकायतकर्ता और आरोपी कानूनी तौर पर शादीशुदा हैं। साथ ही पीड़ित बालिग भी है। ऐसे में दोनों की शादी होने के बाद जबर्दस्ती सेक्स होने पर भी रेप का केस नहीं बनता है।
कोर्ट में आरोपों को साबित नहीं कर पाई महिला
अदालत ने यह भी कहा कि इस बात का भी कोई सबूत नहीं मिल पाया कि आरोपी ने पीड़ित को मैरिज रजिस्ट्रार के दफ्तर ले जाने से पहले कोई नशा दिया था। इस बात का यकीन दिलाने के लिए कोई सबूत नहीं मिल पाया।
दूसरी ओर इस केस में आरोपी बनाए गए शख्स ने बेगुनाह होने का दावा करते हुए कहा कि महिला के घर पर 2 फरवरी 2011 को शादी हुई थी। उसका दावा था कि पत्नी के कहने पर ही उसने गाजियाबाद कोर्ट में शादी रजिस्टर करवाने का फैसला लिया था।
विकास ने यह आरोप भी लगाया कि उसकी बहन का घर का मालिकाना हक उसे न मिल पाने के बाद ही पत्नी ने रेप का केस दायर किया था। अदालत ने आरोपी को बरी करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता के आरोपों के समर्थन में कोई पुख्ता सबूत नहीं मिल पाया।