डीएसजीएमसी (दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी) के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके व अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ गबन के आरोपों की जांच के लिए कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। कमेटी मेंबर गुरमीत सिंह शंटी ने इन पदाधिकारियों पर कमेटी के 51 लाख रुपये गबन करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दायर की थी।
इतना ही अदालत ने थाना नॉर्थ एवेन्यु एसएचओ को भी नोटिस जारी कर पूछा है कि जब संज्ञेय अपराध होने की बात सामने आई थी तो एफआईआर क्यों नहीं की गई। इसके लिए एसएचओ पर क्यों न कानूनी कार्रवाई की जाए। मामले की सुनवाई शुक्रवार को फिर होगी।
पटियाला हाउस अदालत की महानगर दंडाधिकारी विजेता सिंह रावत ने मनजीत सिंह जीके समेत छह आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कर 24 घंटे में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। पुलिस ने इस मामले में संज्ञेय अपराध की बात सामने आने के बाद भी एफआईआर न करने पर पुलिस को फटकार लगाई है।
एसीपी की दलील खारिज
कोर्ट ने संबंधित एसीपी की उस दलील को भी खारिज कर दिया कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा अधिनियम की धारा 32 के मुताबिक कमेटी पदाधिकारियों पर एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि पुलिस कभी एक तो कभी दूसरा कारण बताकर एफआईआर दर्ज करने से बचती रही है, जिस अधिनियम का हवाला दिया गया है उस धारा में केवल दीवानी मामलों की बात की गई है।
दिल्ली पुलिस ने अपनी एटीआर में कहा कि फर्जी बिलों के एवज में चेक जारी कर 51 लाख रुपये की गबन की शिकायत सही है। मामले में आरोपियों ने दो प्रकाशकों के जरिए यह गबन किया था। किताबें खरीदने के नाम पर प्रकाशकों से बिल लिए गए और चेक जारी किए। इसके बाद यह राशि उन प्रकाशकों से नकद वापस ले ली गई।
क्या था आरोप
शिकायतकर्ता शंटी का आरोप था कि कनाडा से एक लाख डॉलर की रकम कमेटी के एक्सिस बैंक खाते में जमा हुई थी। इस राशि को पदाधिकारियों ने निकाला लेकिन उसके बदले में भारतीय मुद्रा बैंक में जमा नहीं की। मनजीत सिंह जीके ने संयुक्त सचिव अमरजीत सिंह पप्पू, पूर्व महाप्रबंधक हरजीत सिंह , प्रकाशक बावा एंड कंपनी, जोगिंदर सिंह एंड कंपनी के साथ मिलीभगत कर 51 लाख रुपये का गबन किया।