उत्तर प्रदेश की एक गरीब बुजुर्ग महिला अपने दिल से निकले पेसमेकर को शरीर से निकलवाने के लिए दिल्ली के अस्पतालों में भटक रही है। आर्थिक हालात ठीक नहीं होने के कारण कोई भी अस्पताल महिला का दर्द कम करने को तैयार नहीं है। मरीज के घर में भी ऐसा कोई नहीं, जो बड़े अस्पताल में उसका इलाज करा सके।
यूपी के सैफई स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में फर्रुखाबाद निवासी 63 वर्षीय रोली सोमवंशी को डॉक्टरों ने सितंबर 2017 में पेसमेकर लगा दिया, लेकिन खराब गुणवत्ता की वजह से वह बाहर निकल आया। अब महिला अपने दिल पर पट्टी बांध अस्पतालों के चक्कर लगा रही है। पेसमेकर फिट नहीं बैठने से महिला का घाव और इंफेक्शन बढ़ता जा रहा है।
रोली सोमवंशी ने बताया पेसमेकर लगने के एक माह बाद ही उसे फिर से परेशानी होने लगी। डॉक्टरों के पास गई तो इलाज करके घर भेज दिया, लेकिन बाद में परेशानी होती रही। इस साल जुलाई में जब दोबारा वह सैफई के अस्पताल पहुंचीं तो डॉक्टरों ने पेसमेकर बदलने की सलाह दी।
इसका खर्च करीब एक लाख 20 हजार रुपये बताया गया। घर में अकेली होने के कारण दिल्ली में रहने वाले उसके भांजे आनंद भदौरिया ने इलाज का बीड़ा उठाया, लेकिन उसके पास भी इतने पैसे नहीं कि वह नया पेसमेकर लगवा सकें।
दिल्ली के अस्पतालों से मिली निराशा
आनंद ने बताया कि वह मरीज को ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत इलाज के लिए ग्रेटर कैलाश स्थित नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट ले गया। वहां यह कहकर मना कर दिया कि उनके पास पहले से भी बहुत सारे मरीज हैं। बेड उपलब्ध नहीं है। हालांकि पेसमेकर शरीर से बाहर न निकले, इसके लिए एक पट्टी कर दी।
इसके बाद वह जीबी पंत अस्पताल ले गए। वहां से यह कहकर लौटा दिया गया कि मरीज का पेसमेकर बॉडी में फिट न बैठने की वजह से घाव बन गया है और संक्रमण हो गया है। ऐसे केस को कोई भी अस्पताल हाथ में नहीं लेता। इसलिए मरीज को वहीं ले जाएं, जहां से पेसमेकर लगवाया गया था।
वापस जाना चाहती है बुजुर्ग महिला
अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद परेशान बुजुर्ग महिला चाहती है कि उन्हें घर छोड़ दिया जाए। वह इलाज के लिए मन्नतें मांगकर थक गईं हैं। आनंद उसे दोबारा सैफई ले जाने की तैयारी में हैं। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर पेसमेकर बदला न गया तो महिला की मौत भी हो सकती है।