अदालत ने जेएनयू नारेबाजी विवाद में स्पेशल सेल के उपायुक्त के पेश न होने पर दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने देशद्रोह का मुकदमा चलाने की अनुमति मिलने में हो रही देरी पर पुलिस उपायुक्त को तलब कर रिपोर्ट मांगी थी। कोर्ट ने दोबारा समन जारी कर शनिवार को पेश होने का निर्देश दिया है। मामला जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद, अनिर्बन भट्टाचार्य व अन्य के खिलाफ देशद्रोह के मुकदमे का है।
पटियाला हाउस अदालत के सीएमएम दीपक सेहरावत के समक्ष केस में जांच अधिकारी पेश हुए और बताया कि दिल्ली सरकार ने अभी तक देशद्रोह की धारा में मुकदमा चलाने की अनुमति प्रदान नहीं की है। अदालत ने जांच अधिकारी से पूछा आप कौन हैं? आपके डीसीपी कहां हैं? रिपोर्ट तो उन्हें पेश करनी थी। अदालत ने पिछली तारीख पर दिल्ली पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा था कि आरोप पत्र दाखिल करने की इतनी जल्दी क्या थी। सरकारी अनुमति मिलने के बाद भी आरोप पत्र दाखिल किया जा सकता था।
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने करीब तीन साल की जांच के बाद जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद व अनिर्बन भट्टाचार्य समेत 10 आरोपियों के खिलाफ देशद्रोह व अन्य धाराओं में मुकदमा चलाने की सरकारी अनुमति के बिना 14 जनवरी 2019 को आरोप पत्र दाखिल किया था। मामला संसद हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी की बरसी पर जेएनयू कैंपस में नौ फरवरी 2016 की रात आयोजित कार्यक्रम से जुड़ा है।
इस मामले में कन्हैया, उमर खालिद व अनिर्बन भट्टाचार्य को गिरफ्तार किया गया था। वह फिलहाल जमानत पर हैं। इनके अलावा आरोप पत्र में सात कश्मीरी छात्रों मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, आकिब हुसैन, रईस, बसारत, उमर गुल, खालिद बशीर को भी नामजद किया गया है। इन आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया था।