दिल्ली के स्वरूप नगर में अपहरण व हत्या के मामले में पीड़ित मासूम की पहचान के लिए अदालत ने दूसरी बार उसकी कब्र खोदने का निर्देश दिया है।
अदालत का यह निर्देश मासूम के डीएनए सैंपल का उसके माता-पिता के डीएनए सैंपल से मिलान न होने पर आया है।
मृतक बच्चे का शव बरामद होने पर दो साल पहले उसे दफना दिया गया था। छह वर्षीय मासूम का वर्ष 2012 में अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद बच्चे का शव नाले से बरामद हुआ था।
कब्र खुदाई की वीडियोग्राफी भी होगी
रोहिणी जिला अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. कामिनी लाऊ ने बच्चे की कब्र खोदने और उसकी वीडियोग्राफी करने एवं सामाजिक, धार्मिक व व्यक्तिगत संवेदनाओं का ध्यान रखने का निर्देश दिया है।
इस दौरान एसीपी व एसएचओ को मौके पर मौजूद रहने और अवशेष मिलने पर उन्हें सील करने का निर्देश दिया गया है।
अदालत ने रिपोर्ट न मिलने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस रिपोर्ट की सच्चाई व प्रमाणिकता को अभियोजन पक्ष ने चुनौती दी है।
अवैध संबंधों पर मालिक ने दिया था दखल
अगर मान लिया जाए कि रिपोर्ट सही है तो अभियोजन पक्ष का सारा केस ही झूठा साबित होगा।
अदालत ने पूछा कि अगर डीएनए रिपोर्ट सही नहीं है तो जिस बच्चे का शव नाले में मिला और डीएनए करवाया गया, वह कौन था और जिस बच्चे का अपहरण हुआ, वह कहां है।
पेश मामले में आरोपी आशीष का एक महिला से संबंध था, जो उसके मकान मालिक को पसंद नहीं था। निजी जिंदगी में मकान मालिक का दखल आशीष को नागवार लगा। आरोप है कि बदले की भावना से उसने वारदात को अंजाम दिया।