फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

DTC को जमीन देना है DDA की ड्यूटी

Fri, 31 Jan 2014 10:14 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि मिलेनियम डिपो को यमुना किनारे से स्थानांतरित करने व आम लोगों के हित में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) को भूमि प्रदान करना डीडीए की ड्यूटी है। अदालत ने डीडीए के उस तर्क पर असहमति जताई है कि भूमि देना उनकी जिम्मेदारी नहीं है।
विज्ञापन


अदालत ने सुनवाई 19 फरवरी तक के लिए स्थगित करते हुए डीडीए को डिपो के लिए वैकल्पिक स्थान का चयन करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति एसके मिश्रा ने सुनवाई के दौरान डीडीए के उस तर्क पर भी असहमति जताई कि कॉमनवेल्थ गेमों के दौरान बसे खड़ी करने के लिए डीटीसी को अस्थाई रूप से यमुना किनारे भूमि दी गई थी लेकिन वहां पक्का निर्माण कर दिया गया।

अदालत ने डीडीए के अधिवक्ता से पूछा कि जब अस्थाई रूप से दी भूमि पर इतना बड़ा डिपो बन रहा था, तब आप ने आपत्ति क्यों नहीं जताई। आप तब कहां थे? क्या आपने कोई कार्रवाई की थी।
विज्ञापन


अदालत ने कहा कि इस मामले में खंडपीठ ने करीब तीन वर्ष पहले फैसला दिया था कि डिपो को स्थानांतरित किया जाए या फिर उसका लैड यूज चेंज किया जाए, तब भी आपने नहीं कहा कि डिपो स्थानांतरित करने के लिए भूमि नहीं है।

अदालत ने सवाल उठाया डीटीसी डिपो खाली करने के लिए तैयार है लेकिन हजारों बसे कहां खड़ी की जाएगी।
अदालत ने कहा कि उपराज्यपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में आपने भूमि देने की बात स्वीकार की, लेकिन अब कह रहे हैं कि भूमि देने में असमर्थ हैं।

डीडीए को दिल्ली के लोगों के हित को देखते हुए नए डिपो के लिए भूमि देनी चाहिए। अदालत का रुख देखकर डीडीए के अधिवक्ता ने इस मुद्दे पर विचार करने के लिए समय मांगा।

इससे पूर्व याची मनोज मिश्रा के अधिवक्ता ने डीडीए के तर्क को गलत बताते हुए का मास्टर प्लान में डिपो के लिए भूमि का प्रावधान है और डीडीए को भूमि प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने कहा मयूर विहार या किसी भी अन्य स्थान पर भूमि दी जा सकती है।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें