दिल्ली की एक कोर्ट ने रियल एस्टेस कंसलटेंट को पत्नी के खर्च और बीमार बेटे के इलाज के लिए 1.80 लाख रुपये देने का निर्देश दिया है। इसके अलावा हर माह 45 हजार रुपये मकान किराये के तौर पर भी देने होंगे।
साकेत जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राज कपूर ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश में सुधार करते हुए यह आदेश दिया। इससे पहले, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने नवंबर 2014 को गुजारा भत्ता व इलाज के लिए 2 लाख व किराये के लिए 55 हजार रुपये हर माह देने का निर्देश दिए थे।
सत्र अदालत ने इस निर्देश में सुधार करते हुए बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश महिला के पति को दिया। पति ने मजिस्ट्रेट कोर्ट से कहा कि वह पहले से 10 हजार रुपये पांच वर्षीय बेटे के इलाज के लिए दे रहा है। उसकी पत्नी पढ़ी लिखी है और अपनी आय छिपा रही है।
वह बेटे का बहाने अपनी मनमानी मांगे पूरा करना चाहती है। उधर, पीड़िता के अधिवक्ता बलेंदु शेखर ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उसकी मुवक्किल को पति छोड़ चुका है। उस पर अपने मानसिक रूप से बीमार अपने बेटे की देखभाल की जिम्मेदारी है।