महिला ने अपनी याचिका में कहा है कि अग्रिम जमानत देते समय तीस हजारी कोर्ट ने उस पर लगे गंभीर आरोपों पर सही ढंग से विचार नहीं किया और न ही कानून का ध्यान रखा। उन्होंने कहा कि अदालत ने जमानत देते समय उसके चरित्र, व्यवहार, उसके बार-बार एक ही अपराध करने, उसकी पहुंच आदि की ओर ध्यान नहीं दिया, जबकि उसके भगोड़ा होने की प्रबल संभावना है।
हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में राजस्थान के मंत्री के बेटे व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने यह नोटिस दुष्कर्म पीड़िता द्वारा आरोपी को अग्रिम जमानत देने के फैसले को चुनौती याचिका पर जारी किया है। न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने दिल्ली सरकार व आरोपी रोहित जोशी को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न जमानत रद्द की जाए? अदालत ने मामले की सुनवाई 23 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी है।
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महिला ने अपनी याचिका में कहा है कि अग्रिम जमानत देते समय तीस हजारी कोर्ट ने उस पर लगे गंभीर आरोपों पर सही ढंग से विचार नहीं किया और न ही कानून का ध्यान रखा। उन्होंने कहा कि अदालत ने जमानत देते समय उसके चरित्र, व्यवहार, उसके बार-बार एक ही अपराध करने, उसकी पहुंच आदि की ओर ध्यान नहीं दिया, जबकि उसके भगोड़ा होने की प्रबल संभावना है।
महिला ने कहा आरोपी प्रभावशाली है और उसके द्वारा गवाहों को प्रभावित करने के प्रबल संभावना है। यदि इस अपराध में उसे दोषी ठहराया जाता है तो उसे कठोर सजा मिल सकती है। महिला ने तर्क रखा कि यह सब संभावना होते हुए भी अदालत ने उसे अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। ऐसे में उसकी अग्रिम जमानत को निरस्त कर दिया जाए।
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वहीं दूसरी ओर मंत्री के बेटे ने इसको लेकर अपने खिलाफ नौ मई को दर्ज प्राथमिकी निरस्त करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था और सुनवाई 26 जुलाई के लिए स्थगित कर दी थी। उसके खिलाफ दुष्कर्म, अपहरण, अप्राकृति यौन संबंध बनाने, मारपीट व जबरन विवाह के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया गया है।