अदालत ने गुड़िया सामूहिक दुष्कर्म मामले में दूसरे आरोपी प्रदीप कुमार को बालिग करार देते हुए व्यस्क की तरह मुकदमा चलाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने पीड़िता की मां की याचिका पर सुनवाई के बाद निचली अदालत को आरोपी की आयु निर्धारित करने का निर्देश दिया था।
कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश लाल सिंह ने मामले में आरोपी प्रदीप कुमार को अस्थि परीक्षण जांच के आधार पर बालिग करार दिया है। अब उस पर अन्य आरोपी मनोज शाह के साथ ही मुकदमा चलेगा। पहले उस पर किशोर न्यायालय में मुकदमा चल रहा था। इसके अलावा अभियोजन पक्ष उसकी जमानत रद्द करने के लिए भी याचिका दायर करेगा क्योंकि उसे नाबालिग के तौर पर जमानत मिली हुई थी।
बचपन बचाओ आंदोलन की ओर से जिरह करते हुए अधिवक्ता वीरेंद्र वर्मा ने कहा कि अस्थि परीक्षण जांच के आधार पर वारदात के समय प्रदीप की आयु 18 साल से अधिक थी। उसके पास ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है, जिसके आधार पर उसकी आयु निर्धारित की जा सके।
पेश मामला पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर इलाके में पांच साल की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म से जुड़ा है। इस वारदात को 17 अप्रैल 2013 को प्रदीप कुमार व मनोज शाह ने अंजाम दिया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। मामले में आरोपी प्रदीप ने खुद को नाबालिग बताते हुए उसका मामला नाबालिग की तरह सुनने की मांग की थी।
निचली अदालत ने उसके मामले को सुनवाई के लिए किशोर न्यायालय भेज दिया था। उसे वहां से जमानत भी मिल गई थी। दूसरी ओर पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रदीप की आयु के मुद्दे पर दोबारा सुनवाई का निर्देश निचली अदालत को देने का आग्रह किया था।