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दिल्ली दंगा: आरोपी इशरत जहां को मिली जमानत, जानिए क्या था पूरा मामला?

Mon, 14 Mar 2022 05:40 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

दिल्ली दंगा मामले में आरोपी इशरत जहां को कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने जमानत देते हुए कहा वर्तमान में आरोपपत्र दायर हो चुका है और वह काफी अरसे से जेल में है। अदलत ने आरोपी को गवाहों से संपर्क न करने व साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने का आदेश भी दिया है। 
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इशरत जहां को मिली जमानत - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अदालत ने सोमवार को दिल्ली दंगा मामले में आरोपी कांग्रेस पार्षद इशरत जहां को जमानत दे दी है। इशरत को मार्च 2020 में भारतीय दंड संहिता, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया था।

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कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने जमानत प्रदान करते हुए कहा वर्तमान में आरोपपत्र दायर हो चुका है और वह काफी अरसे से जेल में है। अदलत ने आरोपी को गवाहों से संपर्क न करने व साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने का निर्देश दिया है। 

इशरत जहां की ओर से पेश अधिवक्ता प्रदीप तेवतिया ने कहा था कि दिल्ली दंगों के बड़े साजिश मामले में उनकी संलिप्तता को दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं हैं और अभियोजन पक्ष ने उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया है। उन्होंने कहा उनकी वादी का मामला अन्य सह-आरोपी व्यक्तियों की तुलना में बेहतर है जिन्हें मामले में जमानत दी गई है। जहां एक वकील रही हैं। वह एक युवा राजनीतिक व्यक्ति है उनके पास एक शानदार कौशल है। वह ऐसे वार्ड से विजयी हुई जहां मुसलमानों की संख्या कम है। दोनों संप्रदायों ने उन्हें वोट दिया था। ऐसे में जमानत स्वीकार की जाए।
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अभियोजन पक्ष ने जमानत आवेदन पर आपत्ति जताते हुए कहा आरोपियों के बीच उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगे करने की एक पूर्व नियोजित साजिश थी। उन्होंने कहा जो कोई भी आपराधिक साजिश के हिस्से के रूप में एकवचन कार्य करता है, वह दूसरे के कृत्य के लिए जिम्मेदार होगा। विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने तर्क दिया था कि जहां एक अन्य आरोपी के संपर्क में थी। उक्त आरोपी से इशरत का कोई  संबंध नहीं था लेकिन केवल दंगा करने की साजिश के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए संपर्क बनाया गया। पिछले साल जुलाई में दिल्ली उच्च न्यायालय ने पूर्व कांग्रेस पार्षद की याचिका को उनके खिलाफ मामले में जांच समाप्त करने के लिए समय अवधि बढ़ाने के खिलाफ खारिज कर दिया था।

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