अदालत ने दुष्कर्म के आरोपी एक डॉक्टर को जमानत देते हुए कहा कि सबूत बताते हैं कि उस व्यक्ति और कथित पीड़िता के बीच सहमति के आधार पर यौन संबंध थे। अदालत ने निष्पक्ष जांच न करने के लिए जांच अधिकारी (आईओ) को फटकार लगाते हुए जांच के तरीके के बारे में उच्च अधिकारी से जांच कराने का निर्देश दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा उस डॉक्टर की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिस पर इस साल 31 मई को शादी के बहाने शिकायतकर्ता के साथ दुष्कर्म और अप्राकृतिक यौनाचार करने का आरोप था। यह देखते हुए कि शिकायतकर्ता ने अपनी आंतरिक जांच से इनकार कर दिया था। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अदालत ने जांच अधिकारी को शिकायतकर्ता के पूर्ववृत्त को सत्यापित करने का निर्देश दिया था और आईओ की रिपोर्ट के अनुसार उसने पहले इसी तरह के आरोपों के साथ एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। महिला ने आपराधिक धमकी, साजिश, गलत तरीके से रोकने की शिकायत भी दर्ज की थी। अदालत ने कहा किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मामले में संबंधित आईओ ने एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी।
इसके अलावा अदालत ने नोट किया कि एक और एफआईआर है जहां शिकायतकर्ता एक आरोपी है। अदालत ने कहा मामले में एक मुख्य गवाह, जो कथित तौर पर उसकी दोस्त थी, ने एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसलिए शिकायतकर्ता और उसके दोस्त का इतिहास कुछ और ही दर्शा रहा है जो वर्तमान मामले में उसके आरोपों के विपरीत है। अदालत ने कहा कि कथित पीड़िता ने जुलाई 2023 में दिल्ली सरकार मध्यस्थता और सुलह केंद्र के समक्ष डॉक्टर के खिलाफ शिकायत भी दर्ज की थी। उसने उस शिकायत में दुष्कर्म का जिक्र नहीं किया था।