महिलाओं को उनके पति के हाथों दुष्कर्म व सभी तरह के यौन शोषण से बचाने की जरूरत है। यह टिप्पणी जिला अदालत ने दुष्कर्म व पत्नी को अप्राकृतिक यौन संबंध के लिये विवश करने के आरोपी पति की जमानत याचिका खारिज करते हुए की है।
रोहिणी जिला अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. कामिनी लाऊ ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी ही पीड़िता का पति है इससे उसका अपराध कम नहीं हो जाता।
महिला ने अपने पति के खिलाफ दुष्कर्म व अप्राकृतिक यौन संबंध का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवाया था। महिला का आरोप है कि उसका पति उसे अश्लील वीडियो दिखाता है और दांत से काट कर उसे जख्मी कर देता है।
महिला की शादी 2009 में हुई थी और पति के हाथों प्रताड़ना की कहानी अपने माता-पिता को भी बताई थी।