हाईकोर्ट ने रियो ओलंपिक के लिए पहलवान नरसिंह पंचम यादव के चयन को चुनौती देने वाले पहलवान सुशील के समक्ष कई सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि जिस नीति के तहत आप तीन बार ओलंपिक में गए उसी नीति को कैसे चुनौती दे सकते है।
नरसिंह ने विश्व कुश्ती में पदक जीत कर ओलंपिक की सीट पक्की की है स्पष्ट है कि वह इसके लिए योग्य है। अदालत ने हालांकि सुनवाई बृहस्पतिवार को भी जारी रखने का निर्णय किया है लेकिन इशारों में उन्होंने नरसिंह के चयन को उचित ठहराया है।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने सुनवाई के दौरान एक बार फिर भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) को आड़े हाथ लिया। अदालत ने कहा कि महासंघ के ग्रुपों में फाइट चल रही है। महासंघ के उपाध्यक्ष राज सिंह ने जो शपथपत्र दायर किया है उससे इसकी पुष्टि होती है।
राज सिंह ने कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास किया है, वे महसंघ के निर्णय के खिलाफ कैसे जा सकते है। वे यह कैसे कह सकते है कि ओलंपिक के लिए सीट पक्की होने के बावजूद ट्रायल होना चाहिए।
उपाध्यक्ष पर अदालत को गुमराह करने के चलते जताई नाराजगी
सुशील कुमार और नरसिंह
अदालत ने कड़े रुख के साथ चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें बताना होगा कि कोर्ट को गलत जानकारी क्यों दी, वरना उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अदालत के रूख को देखते हुए सुशील के अधिवक्ता ने राज सिंह द्वारा दायर शपथपत्र से स्वयं को अलग कर लिया।
अदालत ने कहा कि वर्ष 2004, 08 व 12 के ओलंपिक में सुशील वर्तमान नीति के तहत ही ओलंपिक में गए थे, अब वे उसी नीति को कैसे चुनौती दे सकते है। अदालत ने कहा कि नीति पहले से तय है और उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि ओलंपिक के लिए सीट रिजर्व करने के लिए योग्य पहलवान को भेजा जाता है, जब वह सीट पक्की कर लेता है तो फिर ट्रायल क्यों।
सीट पक्की करने वाले पहलवान को दरकिनार क्यों किया जाए।अदालत ने कहा कि नीति इतनी खराब नहीं कि उसे चुनौती दी जाए। नरसिंह ने विश्वकप कुश्ती में पदक जीत कर ओलंपिक सीट पक्की की है, स्पष्ट है कि वह योग्य है।
अदालत ने कहा कि हमें नहीं पता कि सुशील ने दो वर्ष कुछ नहीं किया। उसकी मानसिक व शारीरिक स्थित के बारे में पता नहीं है, वह योग्य हैया नहीं। जिस समय ओलंपिक के लिए ट्रायल होने थे आप अनफिट थे। अदालत ने कहा कि हर खेल में ऐसा होता ही है कि जिस खिलाड़ी को चोट लगती है उसका चयन नहीं होता। इसे उस खिलाड़ी का दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है।
वहीं दूसरी तरफ सुनवाई के दौरान खेल मंत्रालय ने नरसिंह के चयन संबंधी महासंघ के निर्णय पर अपनी सहमति जताई। सुशील के अधिवक्ता ने एक बार फिर कहा कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष करने के लिए चयन जरूरी है।