अदालत ने 2010 जामा मस्जिद शूटआउट व बम विस्फोट मामले में आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के सह-संस्थापक यासीन भटकल समेत 11 आरोपियों को प्रथम दृष्टया दोषी ठहराया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इन सभी के खिलाफ अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) व भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। अदालत ने इनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया है।
यह आतंकी वारदात 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन से पहले देश में दहशत फैलाने के लिए की गई थी। पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा ने यासीन भटकल व अन्य पर आरोप तय करने के लिए 29 अगस्त की तारीख तय की है।
दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) व भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था। अदालत ने इसी मामले में तीन अन्य आरोपियों सैयद इस्माइल अफाक, अब्दुस सबूर व रियाज अहमद सईदी को आरोप मुक्त कर दिया है।
इन आरोपियों को पुलिस ने बंगलूरू से गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने मीर विहार हथियार फैक्ट्री के सिलसिले में कतील सिद्दीकी को 22 नवंबर, 2011 को आनंद विहार बस अड्डे से गिरफ्तार किया था।
इसने जामा मस्जिद विस्फोट की साजिश का खुलासा किया था। इसके बयान के आधार पर अन्य आरोपियों को जामा मस्जिद मामले में गिरफ्तार किया गया। यह मामला 19 सितंबर, 2010 को जामा मस्जिद के गेट नंबर-तीन के बाहर विदेशी पर्यटकों की बस पर गोलीबारी व उसके कुछ समय बाद वहां एक कार में हुए धमाके से जुड़ा है।
पुलिस का दावा था कि जामा मस्जिद के पास इस आतंकी वारदातों को इसलिए अंजाम दिया गया था, ताकि विदेशी पर्यटक व खिलाड़ी राष्ट्रमंडल खेलों में न आएं। पुलिस का आरोप था कि यासीन भटकल ने प्रेशर कूकर बम तैयार किया था, जिसे जामा मस्जिद के बाहर कार में रखा गया था।
एनआईए ने यासीन भटकल को भारत-नेपाल सीमा से अगस्त 2013 में गिरफ्तार किया था। हैदराबाद 2013 के धमाकों के सिलसिले में विशेष अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। इन धमाकों में 18 लोगों की जान चली गई थी।