आम आदमी पार्टी (आप) बवाना उपचुनाव को दिल्ली सरकार के कामों के सहारे जीतने की कोशिश में है। पार्टी की खास नजर गांव के मतदाताओं पर है, जिनके बीच अभी तक आप की गहरी पैठ नहीं है।
इसके लिये हर गांव में एक 21 सदस्यीय कमेटी का गठन किया जा रहा है। इसमें आम गांववासियों के साथ पार्टी के कार्यकर्ता भी शामिल होंगे। दिलचस्प यह कि कमेटी की सिफारिश पर ही दिल्ली सरकार का ग्रामीण विकास बोर्ड योजनायें तैयार करेगा।
बवाना विधान सभा में करीब 3.25 लाख वोटर हैं। इसमें से करीब एक लाख मतदाता विधान सभा के 26 गांवों से आते हैं। आप का मानना है कि बीते दो चुनावों में बवाना विधान सभा के गांवों से उसे ज्यादा वोट नहीं मिले।
जबकि जेजे बस्ती व कालोनी के वोटरों ने आप में विश्वास जताया था। आप के लिये उपचुनाव बेहद अहम है। इसे आप सरकार के लिटमेस टेस्ट के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में पार्टी की कोशिश है कि गांव के वोटों में भी मजबूत सेंध लगायी जाये।
पार्टी इसका अहम जरिया दिल्ली सरकार के विकास कामों को बनायेगी। दिल्ली सरकार का ग्रामीण विकास बोर्ड बवाना विधान सभा के गांवों के विकास पर अगले दो सालों में करीब 104 करोड़ रुपये खर्च करेगा।
अभी तक विकास कार्यों की रुपरेखा विधायक के स्तर पर तैयार होती थी। लेकिन अब हर गांव में 21 सदस्यीय कमेटी का गठन किया जा रहा है। गैर-सरकारी कमेटी में गांव के आम लोगों के साथ पार्टी कार्यकर्ता भी शामिल होंगे।
गांव के विकास की योजना कमेटी के स्तर पर तैयार होगी। इसकी सिफारिश को ही विधायक बोर्ड तक पहुंचायेगा। माना जा रहा है कि पार्टी को इसका सियासी फायदा मिल सकता है।
दिल्ली सरकार के मंत्री व प्रदेश संयोजक गोपाल राय के मुताबिक, वह फिलहाल गांव में सीधी बात कार्यक्रम के जरिये लोगों से संवाद बना रहे हैं। अभी तक 6 गांवों में कमेटी का गठन हो चुका है। 12 अगस्त तक सभी गांवों में कमेटियां तैयार हो जायेंगी। कमेटी की सिफारिश पर गांव के विकास की योजनायें ग्रामीण विकास बोर्ड तैयार करेगा।
कालोनी से उतारा प्रत्याशी
बेहद सधी रणनीति के तहत पार्टी ने शाहबाद डेयरी में रहने वाले रामचंद्र को प्रत्याशी बनाया है। जबकि अभी तक यहां के विधायक गांव से जीतकर आये हैं। पार्टी एक तरफ गांव के विकास को केंद्र में रख रही है। वहीं, कालोनी के वोटरों को संतुष्ट करने के लिये उनके बीच से प्रत्याशी उतारा है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि आप के पक्ष में दिल्ली सरकार बेहद अहम है। वहीं, पार्टी का मजबूत संगठन व इमानदार प्रत्याशी भी है। जबकि बाकी दोनों दलों के पक्ष में तीनों चीजें नहीं है।
भाजपा का संगठन मजबूत है, लेकिन प्रत्याशी के बाहरी होने से उसका कार्यकर्ताओं से तालमेल नहीं बन पर रहा। फिर, इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट से लडने वाले वेद प्रकाश को लेकर लोगों में नाराजगी भी है। वहीं, कांग्रेस का प्रत्याशी बेहतर होने के बावजूद पार्टी का संगठन मजबूत नहीं है।