फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

CBI छापे से कोर्ट नाराज, क्यों ले गए CM की डायरी

विज्ञापन
विज्ञापन
सीबीआई की विशेष अदालत ने दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के कार्यालय पर छापे के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय पर भी छापेमारी और दस्तावेज बरामद करने के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है।
विज्ञापन


अदालत ने सीबीआई को स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री के दफ्तर में छापेमारी और सरकार के मंत्रिमंडल के निर्णय से संबंधित दस्तावेज को जब्त करने में तय मानदंडों का पालन किया गया या नहीं।

पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अजय कुमार जैन ने सरकार द्वारा जब्त दस्तावेज की मांग को लेकर दाखिल अर्जी पर सुनवाई की।

2015 के मंत्रिमंडल के निर्णय के दस्तावेज क्यों जब्त किए गए

इस दौरान कोर्ट ने सीबीआई से पूछा कि आपने राजेंद्र कुमार के कार्यालय पर छापेमारी के लिए सर्च वारंट लेते समय जो तथ्य बताए थे, उनका उल्लंघन क्यों किया गया।

साथ ही सीबीआई को यह भी बताने के लिए कहा है कि जब संबंधित मामले में उन्हें वर्ष 2007 से 2014 के बीच के दस्तावेज की जांच करनी थी तो इसके बाद के दस्तावेज को क्यों जब्त किया गया।

जबकि ये दस्तावेज वर्ष 2015 के मंत्रिमंडल के निर्णय से संबंधित हैं।

आपको मुख्यमंत्री की डायरी की क्या जरूरत थी

अदालत ने कहा कि सीबीआई छापेमारी के लिए सीबीआई मैन्युअल तय है। आपको मुख्यमंत्री की डायरी की क्या जरूरत थी। डायरी में किसी भी भुगतान का हवाला नहीं है, उसमें मात्र लोगों से मिलने का समय तय है।

क्या यह छापेमारी के लिए तय नियमों का उल्लंघन नहीं है। सीबीआई के अधिवक्ता ने कहा कि हमने तय नियमों का पालन किया है और इसमें मैन्युअल लागू नहीं होता।

अदालत ने कहा कि यदि ऐसा है तो आपके बयान को रिकॉर्ड कर लिया जाता है। इस पर सीबीआई ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। अदालत ने सीबीआई को 15 जनवरी तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
विज्ञापन

इससे सरकार का कामकाज प्रभावित हो रहा है

कोर्ट में दाखिल अपनी अर्जी में दिल्ली सरकार ने तर्क रखा कि सीबीआई मुख्यमंत्री कार्यालय से ऐसी फाइलें ले गई है, जिनका राजेंद्र कुमार पर लगाए गए आरोपों से कुछ लेना-देना नहीं था।

इनमें से काफी फाइलें ऐसी थीं, जिस पर दिसंबर में ही निर्णय लेना था। इससे सरकार का कामकाज प्रभावित हो रहा है। सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा व ऋचा कपूर ने अदालत को बताया कि सीबीआई ने यह छापेमारी बदनीयती से की है।

प्रधान सचिव के कार्यालय में की गई छापेमारी दरअसल मुख्यमंत्री के कार्यालय पर की गई है। उन्होंने सीबीआई के अनुसार राजेंद्र कुमार पर वर्ष 2007 के दौरान पावर, सर्विस व हेल्थ इत्यादि विभागों में अनियमितताएं बरतने का आरोप है। उन्होंने इन विभागों से संबंधित फाइलें मुख्यमंत्री कार्यालय की अपेक्षा संबंधित विभाग के रिकॉर्ड रूम में है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें