अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के सेवानिवृत्त कर्मचारी अजय कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के तहत कवरेज देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी की अस्थायी सेवा की अवधि को योग्य सेवा के रूप में गिना जाएगा, भले ही नियमित नियुक्ति 2004 के बाद हुई हो। न्यायमूर्ति प्रतीक जलान ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के नियम 13 के अनुसार, कर्मचारी की सेवा की शुरुआत उनकी पहली नियुक्ति की तारीख से मानी जाएगी, चाहे वह अस्थायी या ऑफिसिएटिंग क्षमता में हो। कोर्ट ने कहा कि अगर अस्थायी सेवा बिना किसी रुकावट के नियमित नियुक्ति से जुड़ी हुई है तो उसे योग्य सेवा के रूप में गिना जाएगा।
अजय कुमार गुप्ता ने 1989 में जेएनयू में अस्थायी रूप से जेनेटिक इंजीनियरिंग यूनिट (जीईयू) में काम शुरू किया था। जीईयू के बंद होने के बाद, उन्होंने नियमितीकरण की मांग की। 9 अगस्त 2000 को उन्हें जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) के रूप में अस्थायी नियुक्ति मिली, जो विभिन्न विस्तारों के साथ जारी रही। आखिरकार, 22 दिसंबर 2009 से उन्हें नियमित रूप से नियुक्त किया गया और 31 अगस्त 2021 को सेवानिवृत्त हुए। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उनकी चयन प्रक्रिया 1 जनवरी 2004 से पहले पूरी हो गई थी, इसलिए उन्हें नई पेंशन योजना (एनपीएस) के बजाय पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलना चाहिए। कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता की योग्य सेवा 9 अगस्त 2000 से शुरू मानी जाएगी, क्योंकि उसके बाद वे बिना रुकावट के सेवा में रहे। इसलिए, वे 1 जनवरी 2004 से पहले सेवा में माने जाएंगे और ओपीएस के तहत कवर होंगे। जेएनयू को निर्देश दिया गया है कि वह आठ सप्ताह के भीतर आवश्यक आदेश जारी करे और सुधारात्मक कदम उठाए।
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गौरव