मेवात के दो आतंकियों की गिरफ्तारी और उनको लेकर बयानबाजी से मामला विवादों में घिर गया है। इस मामले में दिल्ली और यूपी पुलिस के अलग-अलग बयान आने से उन लोगों को इसके विरोध में बोलने का मौका मिल गया है, जोकि शुरू से इनकी गिरफ्तारी को गलत मानते रहे हैं।
इस मामले में मेवात में पंचायत भी हो चुकी है। वहां इस मामले पर हो रही राजनीति की जमकर आलोचना की गई और कहा गया कि देश के राजनीतिज्ञ ही आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने पांच दिसंबर की रात को वाजिदपुर गांव के शाहिद को पकड़ा था। वह मेवली की मस्जिद में इबादत करता था।
इसके दस दिन बाद मेवात पुलिस की मदद से टाईं के राशिद को हिरासत में लिया गया था। उसके वकील का कहना है कि उसने खुद ही नूंह कोर्ट में समर्पण किया था। इसके बाद ही चर्चा शुरू हो गई थी कि जिसे मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, क्या वह इतना कमजोर है कि बिना पुलिस के दबाव डाले उसने कोर्ट में समर्पण कर दिया।
दिल्ली पुलिस ने पहले कहा कि दोनों गिरफ्तार आरोपी अपने साथियों की मदद से दिल्ली चुनाव के दौरान हिंसा फैलाने की फिराक में थे। यदि ऐसा था तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें चुनाव के पहले क्यों नहीं गिरफ्तार किया। अब कहा जा रहा है कि वह मुजफ्फनगर दंगा पीड़ितों को उकसाने की फिराक में थे।
एक बयान यह भी आया कि गिरफ्तार आतंकी राजस्थान और यूपी दंगे का बदला लेना चाहते थे, जबकि मुजफ्फरनगर पुलिस कप्तान का इस बारे में विवादास्पद बयान आ चुका है। उन्होंने दिल्ली पुलिस की इस थ्योरी को ही नकार दिया है।
इस बारे में मेवात के पुलिस अधीक्षक अनिल धवन का कहना है कि पूरे मामले की जांच दिल्ली पुलिस कर रही है। उसके निर्देशों पर यहां की पुलिस ने काम किया। उसके पास इस बारे में क्या लीड है वही जाने।