शहर का माई बाप कहा जाने वाला नगर निगम अपनी खुद की जमीन नहीं बचा पा रहा है। तीनों जोन एनआईटी, बल्लभगढ़ और ओल्ड जोन में करीब 168 एकड़ से अधिक जमीन पर कब्जा हो चुका है।
जानकर हैरानी होगी कि 4593 एकड़ जमीन पर कब्जे का मामला विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन है। इन सबका कारण निगम अधिकारियों की लापरवाही और गलत लोगों को संरक्षण देना है।
निगम अधिकारियों और नेताओं के संरक्षण के कारण करोड़ों की जमीन विवादित बन गई है। अब इन जमीनों को मुक्त करा पाना नगर निगम के लिए चुनौती बन गया है।
नगर निगम 207 किलोमीटर की परिधि में फैला हुआ है। निगम की अधिकांश जमीन ऐसी है, जहां अधिकारियों और नेताओं के संरक्षण से लोगों ने कब्जा कर लिया है। इनकी कीमत लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में है।
नगर निगम द्वारा तैयार कराए गए आंकड़ों पर नजर डालें तो तीनों जोन में 168 एकड़ जमीन पर स्लम बन चुका है। जबकि कब्जा की गई 4593.78 एकड़ का मामला अब कोर्ट में विचाराधीन है।
अब निगम को अपनी जमीन से कब्जा हटवा पाना चुनौती बन गया है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि निगम की जमीन पर कब्जा कराने के एवज में कई अधिकारियों की जेब खूब गरम की गई।
84 करोड़ की जमीन झुग्गीवालों के कब्जे में:
एक अनुमान के मुताबिक नगर निगम सीमा क्षेत्र में जमीन की कम से कम कीमत 50 लाख रुपये प्रति एकड़ है। ऐसे में निगम की 168 एकड़ कब्जे वाले जमीन की कीमत 84 करोड़ रुपये है। जानकारों का कहना है कि केवल झुग्गीवालों ही 100 करोड़ से अधिक कीमत की जमीन कब्जाए बैठे हैं।