कोरोना वायरस के संक्रमितों की बढ़ती संख्या के बीच अस्पतालों में मरीजों की संख्या इतनी कम क्यों है शायद यह गुत्थी सुलझा ली गई है। बताया जा रहा है कि भारत में जिन लोगों को यह बीमारी है उनमें या तो लक्षण ही नहीं या फिर बहुत मामूली लक्षण हैं।
उदाहरण के लिए सीएम केजरीवाल ने भी बताया था कि दिल्ली में जितने भी केस सामने आए हैं उनमें से 186 मरीजों को कोरोना कहां से लगा यह पता ही नहीं चल सका है और मरीजों में लक्षण न होने के चलते उन्हें पता ही नहीं चला कि वह कोरोना के शिकार हो गए हैं।
केजरीवाल ने कहा कि मैंने संक्रमित लोगों से बात की तो एक व्यक्ति ने बताया कि वह सरकार की खाना बांटने वाली स्कीम के तहत खाना बांट रहा था। केजरीवाल ने ये भी बताया कि उन्होंने रैपिड टेस्टिंग ऑर्डर किया है, ताकि खाना बांटने वाले जगहों के लोगों की टेस्टिंग हो सके।
महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने भी यही बताया था कि 70 प्रतिशत संक्रमित लोगों में या तो लक्षण नहीं थे या बहुत कम लक्षण थे। यही वजह है कि लोग बीमार होने के बाद भी तब तक अस्पताल नहीं जाते जब तक उनकी बीमारी बहुत नहीं बढ़ जाती।