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कोरोना के छह माह: फूल बाजार की उड़ी रंगत, बैंडबाजा भी शांत, दुकान में रखे-रखे ही खराब हो रहे फूल

Fri, 11 Sep 2020 04:48 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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लॉकडाउन की वजह से शहर के फूल बाजारों की रंगत उड़ गई है तो वहीं शादी घरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। विवाह सीजन निकलने के कारण लाखों की आमदनी करने वाले यह लोग अब अपने घरों और दुकानों का किराया भी नहीं दे पा रहे हैं। कोरोना के डर से लोग मंदिरों में भी फूल नहीं चढ़ा रहे हैं। फूलों की बिक्री नहीं होने के कारण कई दुकानें बंद हो गई है तो कुछ ने दूसरा कारोबार शुरू कर दिया। 

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बैंडबाजे वालों को नहीं बुला रहे लोग
न्यू कॉलोनी मोड़ स्थित बालाजी बैंड एवं ऑल हरियाणा बैंड ऐसोसिएशन के प्रधान आशीष नासा ने बताया कि लॉकडाउन के कारण करीब 30 लाख रुपये का नुकसान हो गया है। विवाह में मेहमानों की संख्या सीमित होने के कारण लोग बैंडबाजे नहीं बजवा रहे हैं। साधारण तरीके से लोग विवाह कर रहे हैं। ऐसे में बैंड बाजार के हालात काफी खस्ताहाल हो गए हैं। आम दिनों में तो लोग शादियों के अलावा कुआं पूजन, जलसे आदि में भी बैंड बाजों का प्रयोग करते थे।

नहीं हो रही बैंक्वेट हाल में शादियों की बुकिंग
शहर के राजवंशी महल के संचालक राहुल पाहुजा ने बताया कि कोरोना के कारण मेहमानों की संख्या सीमित होने से लोग अपने घरों में ही विवाह समारोह कर रहे हैं। हालत ऐसी हो गई है कि छह माह से बैंक्वेट हाल का किराया और स्टाफ का वेतन भी घर से देना पड़ रहा है। एक-दो शादी की बुकिंग हुई थी, जिसमें सिर्फ 50 लोग ही शामिल हो पाए। साधारण तरीके से लोगों ने रस्म पूरी कर तीन घंटो में ही शादी कर दी। आम दिनों में एक माह में ही करीब 15 से 20 लाख रुपये का कार्य होता था।
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दुकान में रखे-रखे ही खराब हो रहे फूल
माता चिंतपूर्णी मंदिर में फूल बेचने वाले सचिन ने बताया कि कोरोना के इन छह माह में रोटी के लाले पड़ गए हैं। जब से अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई तब से सुबह दिल्ली से फूल लेकर आते हैं, लेकिन लोग फूल खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इस कारण जो फूल मंडी से लेकर आते हैं वह दुकान में रखे-रखे ही खराब हो जाता है। पहले एक दिन में 4  से 5 हजार रुपये का रोजाना कार्य होता था, लेकिन अब तो सिर्फ 500 रुपये का काम भी मुश्किल से होता है।

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