कोरोना वायरस से मुकाबले की जंग में विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ ही डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, पायलट, क्रू मेंबर और दूसरे कई विभागों की अहम भूमिका दिख रही है। इनमें केंद्रीय सुरक्षा बल और सिविल महकमे भी अग्रणी हैं।
पिछले दिनों ऐसी खबरें आती रही हैं कि विदेशों में कोरोनावायरस का संक्रमण फैलने के बाद वहां मौजूद भारतीयों को स्वदेश लाने वाले पायलट और क्रू मेंबर के साथ भी अच्छा सलूक नहीं हो रहा है।
ये लोग जहां रहते हैं, वहां इन्हें कई तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही हैं। इसी तरह की परेशानी अब स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों को भी आने लगी है। एम्स के डॉक्टरों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर यह शिकायत की है कि उन्हें मकान मालिक परेशान कर रहे हैं। उन्हें जबरन मकान खाली करने के लिए कहा जा रहा है। नर्सों एवं पेरामेडिकल स्टाफ के साथ भी ऐसा ही व्यवहार हो रहा है।
मंगलवार को एम्स की रेजिडेंट डॉक्टर वेलफेयर एसोसिएशन ने अमित शाह को लिखे अपने पत्र में कहा है कि हमारा जो भी स्टाफ कोरोना वायरस की लड़ाई में शामिल है, उसे परेशानी उठानी पड़ रही है। जो भी डॉक्टर, नर्स एवं दूसरा स्टाफ किराए के मकान में रहता है, उसे वहां से जाने के लिए कहा जा रहा है।
कई जगह पर मकान मालिकों ने जबरन घर खाली करा लिया है। आसपास के लोग उन्हें संदेह की नजर से देखते हैं। वे लोग सोचते हैं कि इनकी वजह से उन्हें कोरोना वायरस का संक्रमण हो सकता है। एसोसिएशन का कहना है कि कई डॉक्टरों को भी घर-बेदखली झेलनी पड़ी है।
डॉक्टरों ने केंद्रीय गृहमंत्री से आग्रह किया है कि ऐसी विकट स्थिति से जूझने के बावजूद जो उन्हें परेशान किया जा रहा है, उससे बचाने के लिए एक आदेश जारी करें कि कोई भी मकान मालिक किसी डॉक्टर, नर्स या दूसरे मेडिकल स्टाफ से घर खाली करने के लिए न कहे।
इसके अलावा अब लॉकडाउन के चलते अधिकांश ट्रांसपोर्ट के साधन बंद हो चुके हैं, ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य कर्मियों को अस्पताल तक पहुंचने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हें ट्रांसपोर्ट मुहैया कराया जाए। साथ ही पुलिस को भी यह हिदायत दी जाए कि वह आईकार्ड देखकर डॉक्टर, नर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ को जाने दें।