कोरोना वायरस के मरीजों को हो रहा नया इंफेक्शन
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अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. मनीष मंजुल का कहना है कि संक्रमित होने के बाद सबसे पहले नाक बंद होती है और उसके बाद गाल व जबड़े पर सूजन आती है। इसके बाद आंखों से दिखाई देना बंद होने लगता है। यह पूरी प्रक्रिया महज चार से पांच दिन में हो रही है।
नाक और जबड़े तक समस्या आने पर मरीज ध्यान नहीं दे रहा लेकिन जब उसे आंखों से दिखना बंद होने लगता है तो उसे पास अस्पताल जाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं होता। अस्पताल में आए सभी 13 मामलों में यह समस्या देखने को मिली। डॉ. मंजुल का कहना है कि एलर्जी इतनी तेजी से बढ़ती है कि वह कुछ भी उपचार का इंतजार नहीं करती और अंग खत्म होने लगते हैं। अभी तक कोरोना वायरस के ऐसे दुष्प्रभाव सामने नहीं आए हैं।
पश्चिमी दिल्ली के ही निवासी 32 वर्षीय राजेश को 20 नवंबर से बुखार की शिकायत थी। घर में बुजुर्ग सदस्यों की वजह से उन्होंने अपनी जांच कराई तो वह कोरोना संक्रमित मिले। मधुमेह होने के चलते चार दिन बाद उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई और शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगी। इसके चलते उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया जहां से सात दिन बाद वह डिस्चॉर्ज भी हो गए लेकिन घर आने के दो दिन बाद आंखों के आसपास सूजन दिखाई देने लगी।
उन्होंने दोबारा डॉक्टरों ने जानकारी ली तो उन्हें पेनकिलर दे दी गईं लेकिन कुछ ही समय बाद मरीज को आपातकालीन स्थिति में भर्ती करना पड़ा। जांच में पता चला कि उन्हें म्युकर नामक एजर्ली हुई जिसकी पहचान नाक से सैंपल लेने पर हुई। एमआरआई से पता चला कि उनकी आंख, जबड़ा और चेहरे की मांसपेशियां तक खत्म हो चुकी थीं और एलर्जी दिमाग की ओर बढ़ रही थी। इसके बाद उनका ऑपरेशन किया गया है। फिलहाल वह डॉक्टरों की निगरानी में हैं।
डॉ. मंजुल ने बताया कि उनके यहां पिछले कुछ ही दिन में 10 मरीज ऐसे भी आएं हैं जोकि अपनी आंखों की 50 फीसदी रोशनी खो चुके हैं। यह रोशनी वापस नहीं आ सकती है। इनमें से पांच मरीज अभी अति गंभीर स्थिति में हैं। वहीं डॉ. वरुण राय ने बताया कि कोरोना संक्रमित मरीजों में किसी भी प्रकार की सूजन एक तरह का संकेत हो सकता है। अगर इस तरह का कोई लक्षण मिलता है तो उसका जितना जल्दी हो सके, उपचार लेना जरूरी है।