दिल्ली में साफ हुई हवा, लॉकडाउन के बाद साफ नीला दिख रहा आसमान
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लॉकडाउन के चलते आम लोग जरूर परेशान हैं लेकिन इसने वातावरण को स्वच्छ कर दिया है। इन दिनों सड़कों पर कम गाड़ियां चल रही हैं और फैक्टरियां भी बंद हैं, ऐसे में दिल्ली की हवा से हानिकारक प्रदूषक तत्व खत्म हो रहे हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की एक रिपोर्ट में ये बात कही गई है। इसके अनुसार, दिल्ली की हवा में पीएम 2.5 में 46 प्रतिशत की कमी आई है तो पीएम 10 में 50 प्रतिशत की कमी दिखी है।
सीपीसीबी ने यह रिपोर्ट 38 वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग स्टेशनों के लगातार अध्ययन से पेश की है। यह अध्ययन 16 मार्च से 15 अप्रैल के बीच किया गया। वायु गुणवत्ता के ट्रेंड को दो चरणों में मापा गया है। लॉकडाउन से पहले वाला 16 से 21 मार्च का चरण और लॉकडाउन के दौरान 25 मार्च से 15 अप्रैल।
सीपीसीबी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वायु में पीएम 2.5, पीएम 10 और नाइट्रोजन डाईऑक्साइड के स्तरों में भारी गिरावट आई है। इस कमी का कारण लॉकडाउन में बंद हुई फैक्टरियां, सड़कों पर कम हुए वाहन हैं। यह दोनों ही बेंजीन पैदा करने का बड़ा स्रोत हैं जिससे हवा प्रदूषित होती है।
हालांकि सल्फर डाईऑक्साइड में सिर्फ 19 प्रतिशत की कमी देखी गई है, इसका कारण शायद ये है कि दिल्ली में 70 प्रतिशत एसओ2 पावर प्लांट से उत्सर्जित होते हैं जो लॉकडाउन के दौरान भी चल रहे हैं।
सीपीसीबी ने प्रदूषण के 13 हॉटस्पॉट का भी आकलन किया और पाया कि आनंद विहार में पीएम 2.5 और पीएम 10 और एनओ2 में क्रमषः 62 प्रतिशत, 69 प्रतिशत और 72 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की।
हालांकि अंत में इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी भले ही दिल्ली की हवा साफ है लेकिन 15-16 अप्रैल से पश्चिम प्रदेशों से धूलभरी हवा चलने के कारण पीएम 10 और 2.5 के स्तर में बढ़ोतरी हो सकती है। गर्मी बढ़ने से भी कुछ प्रदूषण बढ़ सकता है।